Masood Azhar Warrant : पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख आतंकी मसूद अजहर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया है। यह जानकारी पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (FIA) की अपडेटेड मोस्ट वांटेड आतंकियों की रेड बुक से सामने आई है। नई सूची में मसूद अजहर का नाम शामिल करते हुए उसके सिर पर घोषित इनाम की राशि बढ़ाई गई है। पाकिस्तान का यह कदम आतंकी संगठनों के खिलाफ उसकी कार्रवाई को लेकर उठते रहे सवालों के बीच सामने आया है।
2021 के मुकाबले इनाम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी
FIA ने वर्ष 2021 में भी मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड सूची में रखा था। उस समय उसके ऊपर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित था। अब करीब पांच वर्ष बाद इस रकम को बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया गया है। हालांकि, पाकिस्तान के इस कदम को लेकर आलोचक सवाल उठा रहे हैं और इसे वास्तविक कार्रवाई के बजाय अंतरराष्ट्रीय दबाव कम करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

पाकिस्तान का दावा, अफगानिस्तान में छिपा है अजहर
पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता आया है कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और उसने अफगानिस्तान में शरण ले रखी है। वर्ष 2021 में भी पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इसी तरह के दावे किए गए थे। दूसरी ओर, भारतीय खुफिया एजेंसियों के तकनीकी विश्लेषण का हवाला देते हुए उसके पाकिस्तान में मौजूद होने की बात कही जाती रही है। हालांकि, उसके मौजूदा ठिकाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नई रेड बुक में 26/11 से जुड़े नाम भी शामिल
FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से जुड़े कई आरोपियों के नाम भी बताए गए हैं। इन लोगों पर हमले के आतंकियों को मदद पहुंचाने, उन्हें समुद्री रास्ते से मुंबई तक पहुंचाने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जैसे आरोप हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में कई संदिग्धों के नाम के साथ उनकी कथित भूमिका से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की गई है।

दो आरोपियों की जानकारी में बदलाव की बात
नई सूची में कुछ आरोपियों की पुरानी जानकारी में बदलाव किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दो संदिग्धों की तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंध और 26/11 हमले में उनकी भूमिका से संबंधित विवरण हटा दिए गए हैं। हालांकि, दोनों के नाम अब भी सूची में मौजूद हैं। इनमें तुर्बत निवासी मोहम्मद खान का नाम बताया गया है, जिस पर आतंकियों को मुंबई पहुंचाने के लिए अल-हुसैनी नाव उपलब्ध कराने का आरोप है।
अब्दुल रहमान का नाम भी बरकरार
बहावलनगर के रहने वाले अब्दुल रहमान का नाम भी FIA की मौजूदा सूची में बताया गया है। उस पर लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने और 26/11 हमले में भूमिका निभाने के आरोप लगाए गए थे। दावा है कि वर्ष 2021 की सूची में उसकी तस्वीर और कथित भूमिका का विवरण मौजूद था, लेकिन अपडेटेड सूची में ये जानकारियां हटा दी गई हैं। इस बदलाव ने पाकिस्तान की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

समुद्री रास्ते से मदद करने वाले 11 आरोपी
रिपोर्ट के मुताबिक, FIA की सूची में 11 ऐसे लोगों के नाम हैं, जिन पर 26/11 हमले के आतंकियों को अल-हुसैनी और अल-फौज नावों के जरिए समुद्री रास्ते से आगे बढ़ाने में सहायता करने का आरोप है। इनमें मोहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मोहम्मद उस्मान, अतीक उर रहमान, रियाज अहमद, मोहम्मद मुश्ताक और अन्य संदिग्धों के नाम शामिल बताए गए हैं।
आर्थिक मदद के आरोप में छह नाम
सूची में छह ऐसे लोगों का भी उल्लेख बताया गया है, जिन पर 26/11 हमले के लिए आर्थिक सहायता देने के आरोप हैं। इनमें मोहम्मद इफ्तिखार अली पर वीओआईपी कनेक्शन के लिए 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का आरोप बताया गया है। इसके अलावा मोहम्मद जिया, मोहम्मद अब्बास नासिर, जावेद इकबाल, मुख्तार अहमद और अहमद सईद के नाम भी सामने आए हैं।

कई आरोपी करीब 18 वर्षों से फरार
FIA के अनुसार, 26/11 हमले से जुड़े बताए जा रहे कई आरोपी लंबे समय से फरार हैं। रिपोर्ट में दावा है कि कुछ संदिग्ध करीब 18 वर्षों से एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर हैं। भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि इनमें से कुछ लोग पाकिस्तान में ही मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मोस्ट वांटेड आतंकियों की संख्या में 35 प्रतिशत इजाफा
FIA की रेड बुक के आंकड़ों में भी पिछले पांच वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में सूची में करीब 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है। यानी लगभग पांच वर्षों में सूची में करीब 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क और उसके खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता पर नए सवाल उठ रहे हैं।










