Haryana News: रोहतक स्थित भाजपा कार्यालय ‘मंगल कमल’ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तीखा प्रहार किया। राज्य पर बढ़ते कर्ज संबंधी हुड्डा के बयानों को खारिज करते हुए उन्होंने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना और पब्लिसिटी स्टंट करार दिया।
भूपेंद्र हुड्डा पर सियासी तंज और सदन से पलायन का आरोप

डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि भूपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस पार्टी केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए कर्ज जैसे मुद्दों पर बयानबाजी करती है। छह बार के विधायक रह चुके हुड्डा पर आरोप लगाया कि जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विधानसभा में जवाब या संबोधन देते हैं, तब हुड्डा सदन में टिकने के बजाय बाहर चले जाते हैं। विधानसभा में प्रतिदिन उठने वाले करीब 20 अहम सवालों और स्वास्थ्य, शिक्षा व गरीब कल्याण जैसे गंभीर विषयों पर विपक्ष सार्थक चर्चा से बचता है, जबकि वरिष्ठ राजनेता होने के नाते उन्हें सदन की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए।
पीएम मोदी के 25 साल पूरे
प्रेस वार्ता का मुख्य केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भाजपा द्वारा आयोजित किए जाने वाले विशेष आयोजनों की रूपरेखा था। 17 सितंबर (पीएम मोदी का जन्मदिन) से 17 अक्टूबर 204 तक यानी पूरे एक महीने यह अभियान चलेगा।
17 सितंबर को देशवासी अपने घरों में दीप जलाकर सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत में सहभागिता करेंगे। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने के वास्ते बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों समेत हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
बच्चों की प्रतियोगिता और ऑनलाइन पब्लिक पोर्टल

सेवा संकल्प अभियान के तहत जन-समस्याओं के समाधान और वैचारिक सहभागिता के लिए विशेष डिजिटल और रचनात्मक पहल की गई है:
बच्चों के लिए ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर विशेष पेंटिंग/निबंध प्रतियोगिता आयोजित होगी। नागरिकों के लिए समर्पित एक विशेष वेबसाइट लॉन्च की गई है। इस पर लोग बिजली, पानी, सड़क एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी अपनी समस्याएं और उपयोगी सुझाव ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। बेहतर और रचनात्मक सुझाव देने वाले नागरिकों को पार्टी व प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने अंत में आह्वान किया कि सरकार का फोकस नीतिगत विकास और अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने का है, इसलिए विपक्ष को रचनात्मक आलोचना का मार्ग अपनाना चाहिए न कि सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी का।










