Haryana News: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियर्स का गुस्सा अब उग्र रूप ले चुका है। ‘हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के आह्वान पर सोमवार को प्रदेशभर में डिवीजन स्तर पर जोरदार आक्रोश प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों में संयुक्त किसान मोर्चा और विभिन्न मजदूर संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बिजली कर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। पूर्व घोषित आंदोलन के तहत 4 और 5 अगस्त को भी ये प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे, जबकि आंदोलन के अगले चरण में 6 से 8 अगस्त तक राज्य की सभी सब-डिवीजनों में प्रदर्शन किए जाएंगे।
Haryana News: हरियाणा भाजपा में बदलाव की लहर, भूपेश्वर दयाल को मिली अहम जिम्मेदारी
प्रमुख मांगें और निजीकरण के खिलाफ विरोध
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं—रविन्द्र घणघस, बलजीत बेनीवाल, देवेंद्र सिंह हुड्डा, सुरेश राठी, इकबाल चांदना, यशपाल देसवाल, बिजेंद्र बराड़ और विजेंदर भाटिया—ने सोमवार के प्रदर्शनों की सफलता पर संतोष जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी लड़ाई सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ है। कर्मचारियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
नूंह और गुरुग्राम में समानांतर (पैरेलल) लाइसेंस देने के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।
कृषि क्षेत्र के लिए 15 अगस्त से अलग से ‘एग्री डिस्कॉम’ बनाने की योजना पर रोक लगाई जाए।
स्मार्ट मीटरिंग के प्रोजेक्ट और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के तमाम प्रयासों को पूरी तरह बंद किया जाए।
वर्षों से कार्यरत ठेका कर्मचारियों को सिर्फ जॉब सिक्योरिटी देने के बजाय उन्हें पक्का किया जाए।
कर्मचारियों के लिए 5,000 रुपये रिस्क अलाउंस लागू किया जाए।
एक्स-ग्रेशिया रोजगार योजना से अनावश्यक शर्तों को हटाया जाए।
कार्यभार (वर्क लोड) के अनुसार नए पदों का सृजन किया जाए तथा रिक्त पदों को नियमित भर्ती से भरा जाए।
आरक्षित श्रेणी के बैकलॉग को भरा जाए और इंटर-यूटीलिटीज ट्रांसफर नीति लागू की जाए।
सरकार और निगम प्रबंधन पर गंभीर आरोप
मोर्चा के नेताओं ने राज्य सरकार और निगम प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे हड़ताल के नोटिस को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। नेता देवेंद्र सिंह हुड्डा ने विशेष तौर पर उल्लेख किया कि एक तरफ हड़ताल का नोटिस दिया जा चुका है, वहीं दूसरी तरफ सोनीपत में वितरण व रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) का काम दो साल के लिए निजी एजेंसी को सौंपकर प्रबंधन ने “जले पर नमक छिड़कने” का काम किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो 11 से 13 अगस्त तक होने वाली तीन दिवसीय हड़ताल अत्यंत ऐतिहासिक और अभूतपूर्व होगी।
राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन: सुभाष लांबा का बयान
हरियाणा के बिजली कर्मचारियों के इस आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। ‘नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स’ (NCCOEE) के वरिष्ठ सदस्य एवं ‘इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (EEFI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि हरियाणा के हालात को देखते हुए NCCOEE ने 4 अगस्त को एक अहम ऑनलाइन बैठक बुलाई है। इस बैठक में हरियाणा सरकार की निजीकरण की नीतियों के खिलाफ और बिजली कर्मियों की हड़ताल के साथ एकजुटता जताते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
सुभाष लांबा ने हरियाणा सरकार से अपील की है कि वे पैरेलल लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग जैसे फैसलों को तुरंत वापस लें। इसके साथ ही, ठेका कर्मचारियों को पक्का करने समेत सभी लंबित मांगों का बातचीत के जरिए समाधान निकालकर इस आसन्न हड़ताल को टालने की पहल करें।
Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूल होंगे हाईटेक, तैयार होगा डिजिटल नक्शा और डाटा










