Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) ने प्रदेशभर के सभी सरकारी स्कूलों के भवनों और परिसरों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब हर स्कूल का डिजिटल लेआउट प्लान और नक्शा तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य के विकास कार्यों को एक नई दिशा मिलेगी।
Haryana News: भाजपा का मास्टरस्ट्रोक! दक्षिण हरियाणा में पकड़ मजबूत करने के लिए नई रणनीति
डिजिटल लेआउट और मैपिंग का स्वरूप
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्कूलों के भवन, अलग-अलग कक्षाओं के कक्ष, शौचालय, खेल मैदान, बाउंड्रीवाल, मुख्य द्वार और स्कूल परिसर में मौजूद खाली भूमि का पूरा डिजिटल ब्योरा तैयार किया जाएगा।
ऑटोकैड (AutoCAD) सॉफ्टवेयर का उपयोग: यह सारा तकनीकी कार्य योग्य आर्किटेक्ट्स के माध्यम से अत्याधुनिक ऑटोकैड सॉफ्टवेयर पर कराया जाएगा।
ऑनलाइन डेटाबेस: डिजिटल मैपिंग पूरी होने के बाद राज्य के प्रत्येक सरकारी स्कूल का पूरा नक्शा और लेआउट ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगा।
सटीक योजनाएं: इससे भविष्य में नए कमरों के निर्माण, प्रयोगशालाओं, शौचालयों, खेल मैदानों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की रूपरेखा बेहद सटीक और तेज गति से तैयार की जा सकेगी। साथ ही पूरे प्रदेश के स्कूलों का एक एकीकृत डिजिटल डाटाबेस भी तैयार होगा।
स्कूलों के पास नक्शों का अभाव और सुधारीकरण की पहल
अक्सर कई स्कूलों के पास उनके भवनों का अद्यतन लेआउट उपलब्ध नहीं होता था, जिसके कारण स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार के निर्माण या मरम्मत कार्य शुरू करने में काफी समय लग जाता था।
बीते समय में कंडम भवनों के जर्जर होने के कारण कई स्थानों पर अप्रिय घटनाएं सामने आई थीं और बरसात के दिनों में जलभराव जैसी समस्याओं ने मुश्किलें बढ़ाई थीं। इन गंभीर हादसों और समस्याओं से सबक लेते हुए शिक्षा विभाग ने यह सख्त कदम उठाया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अब डिजिटल ब्लूप्रिंट होने से उच्चाधिकारी खुद स्थिति का संज्ञान ले सकेंगे और जरूरत के अनुसार तुरंत बजट जारी कर सकेंगे।
तकनीकी कार्यों और सर्वे के लिए निर्धारित दरें
शिक्षा विभाग ने इस डिजिटल कार्य को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए स्पष्ट वित्तीय दिशा-निर्देश और मानक दरें (Standard Rates) तय की हैं। स्कूल इस कार्य का खर्च अपने ‘कॉमन स्कूल वेलफेयर फंड’ या अन्य स्वीकृत फंड से वहन कर सकेंगे:
ड्राइंग और एस्टीमेट: स्ट्रक्चरल ड्राइंग एवं डिजाइन के लिए 2.50 रुपये प्रति वर्ग फुट, सिविल कार्यों के विस्तृत एस्टीमेट के लिए 1.15 रुपये प्रति वर्ग फुट और पब्लिक हेल्थ एवं इलेक्ट्रिकल एस्टीमेट के लिए 2.05 रुपये प्रति वर्ग फुट तय किए गए हैं।
कंसल्टेंसी और प्रिंटिंग: प्रूफ चेकिंग एवं कंसल्टेंसी के लिए 1.50 रुपये प्रति वर्ग फुट, ऑटोकैड ट्रेसिंग 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर, A-3 साइज ड्राइंग प्रिंट 40 रुपये प्रति प्रिंट और स्टील बार बेंडिंग शेड्यूल 1.25 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित है।
सर्वे और जियोटेक्निकल जांच: बाउंड्रीवाल के विस्तृत प्लान के लिए 12,000 रुपये प्रति सेट और टोटल साइट सर्वे के लिए 150 रुपये प्रति 100 वर्ग मीटर तय किए गए हैं। नए भवनों के लिए 10 मीटर तक जियोटेक्निकल जांच के 12,500 रुपये, 10 से 15 मीटर तक 14,000 रुपये तथा 15 मीटर से अधिक के लिए 14,500 रुपये खर्च किए जाएंगे।
फतेहाबाद में जिला प्रशासन की सख्ती
फतेहाबाद की जिला शिक्षा अधिकारी संगीता बिश्नोई ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जिले के सभी 620 सरकारी स्कूलों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। सभी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित प्रारूप के अनुसार समयबद्ध तरीके से अपना डिजिटल लेआउट तैयार करवाएं और जिला कार्यालय के माध्यम से इसे मुख्यालय भेजें। इस डिजिटल लेआउट के माध्यम से यह आसानी से पता चल जाएगा कि किस स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की क्या कमी है, जिसे समय रहते तुरंत दूर किया जा सके।
Haryana News: भारत निर्माण युवा दल की पहल, नशा मुक्त भारत के लिए विशेष कांवड़ यात्रा










