Haryana News: हरियाणा सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयां देने के लिए बड़े और दूरदर्शी फैसले लिए हैं। चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सहकारी फेडरेशन, डेरीफेड, वीटा बूथ, हरहित स्टोर, लेबरफेड और हाउसफेड जैसी महत्वपूर्ण सहकारी संस्थाओं की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सरकार का मुख्य उद्देश्य सहकारी फेडरेशन को वित्तीय घाटे से उबारना, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
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558 नए वीटा बूथ और डेयरी उत्पादों का विविधीकरण
सहकारिता क्षेत्र को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार का निर्णय लिया है। राज्य में दुग्ध उत्पादों की पहुंच आम जनता तक और अधिक आसान बनाने के लिए 558 नए वीटा बूथ खोले जाएंगे। इसके साथ ही प्रदेश में वीटा बूथों की कुल संख्या बढ़कर 1,232 हो जाएगी (चूंकि पहले से 674 बूथ संचालित हैं)। ये नए वीटा बूथ रेलवे स्टेशनों, प्रमुख पर्यटन (टूरिज्म) क्षेत्रों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों और सिविल अस्पतालों में स्थापित किए जाएंगे, ताकि लोगों को शुद्ध डेयरी उत्पाद आसानी से मिल सकें।
उत्पादों का विविधीकरण: फेडरेशन को घाटे से उबारने के लिए अब वीटा ब्रांड के तहत केवल दूध ही नहीं, बल्कि आइसक्रीम और अन्य मूल्यवर्धित (Value-added) उत्पाद भी बड़े पैमाने पर तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा, भारतीय रेलवे और सेना (डिफेंस) के लिए भी दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार
हरियाणा में मुर्राह नस्ल की भैंसों के उच्च दुग्ध उत्पादन को देखते हुए डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई नई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं:
दैनिक खरीद: वर्तमान में सहकारी समितियों के माध्यम से प्रतिदिन 5 लाख लीटर दूध की खरीद की जा रही है, जिसे और बढ़ाने का लक्ष्य है।
महिला स्व-सहायता समूह: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि पैक्स (PACS) के माध्यम से महिलाओं के समूहों को दूध की डेयरी शुरू करने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाए। राज्य के 143 स्वयं सहायता समूहों ने इस पहल के लिए अपनी सहमति भी दे दी है।
नए दुग्ध प्लांट और चिलिंग सेंटर: बावल में 1.50 लाख लीटर क्षमता का नया दुग्ध प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 5 लाख लीटर किया जाएगा। इसके अलावा, अंबाला में भी 1.50 लाख लीटर क्षमता का नया प्लांट लगाया जा रहा है। राज्य के सभी जिलों में 5 से 10 हजार लीटर की क्षमता वाले 21 मिल्क चिलिंग सेंटर भी खोले जाएंगे।
पैक्स (PACS) का आधुनिकीकरण और अन्य कल्याणकारी योजनाएं
सहकारी समितियों और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई अहम बदलाव किए गए हैं:
ऑनलाइन पंजीकरण और बहुउद्देशीय कार्य: राज्य की 800 सहकारी समितियों में से 710 का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने सभी पैक्स को बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समिति (एम-पैक्स) में बदलने के आदेश दिए हैं, जिससे इन केंद्रों पर सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर), कैटल फीड, बीज बिक्री, खाद और कीटनाशक दवाइयों सहित 33 प्रकार की सेवाएं मिल सकेंगी।
हरहित स्टोर और अन्य पहल: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 1400 हरहित स्टोर खोले जाएंगे। साथ ही, पंचायतों में आईओसीएल (IOCL) के लिए 300 स्थलों की पहचान की गई है।
चीनी मिलों के लिए निर्देश: सहकारी चीनी मिलों में गन्ने की पिराई का लक्ष्य 130 दिन करने और रिकवरी लक्ष्य को बढ़ाकर 10% करने को कहा गया है। कैथल चीनी मिल में उच्च गुणवत्ता का गुड़ तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, सरकारी विभागों और बोर्डों के कार्यालयों में सहकारी मिलों में तैयार चीनी के पाउच का ही उपयोग किया जाएगा। हरकोफेड के माध्यम से गरीब परिवारों को 7% ब्याज पर 12.50 लाख रुपये तक का आवास ऋण भी मुहैया कराया जा रहा है।
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