Haryana News: हरियाणा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के पहले चरण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की गई है। इस प्रक्रिया में कई रिकॉर्ड में त्रुटियां और तकनीकी विसंगतियां सामने आई हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार राज्य में कुल 2 करोड़ 6 लाख 55 हजार 929 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से बड़ी संख्या में वोटरों के रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है ताकि अंतिम मतदाता सूची पूरी तरह सही और पारदर्शी बनाई जा सके।
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26.29 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ी
जांच के दौरान करीब 26.29 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विभिन्न प्रकार की त्रुटियां और विसंगतियां पाई गई हैं। इनमें नाम, पता, पहचान संबंधी जानकारी या अन्य तकनीकी कमियां शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 18.57 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड की सही मैपिंग नहीं हो सकी, जिसके कारण उनके विवरण का सत्यापन अभी पूरा नहीं हो पाया है।
निर्वाचन विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 33 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनके नाम फिलहाल ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
1.28 करोड़ से अधिक मतदाता सुरक्षित श्रेणी में
विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार लगभग 1 करोड़ 28 लाख 69 हजार 929 मतदाताओं का रिकॉर्ड पूरी तरह सही पाया गया है। इन मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में बिना किसी परेशानी के शामिल होने की पूरी संभावना है। यानी राज्य के एक बड़े वर्ग के मतदाताओं को किसी अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी।
गलत रिकॉर्ड वाले वोटरों को मिलेगा सुधार का मौका
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में त्रुटियां पाई गई हैं या जिनकी मैपिंग पूरी नहीं हो सकी है, उनके नाम सीधे मतदाता सूची से नहीं हटाए जाएंगे। ऐसे सभी मतदाताओं के नाम पहले ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में प्रकाशित किए जाएंगे।
इसके बाद संबंधित मतदाताओं को विभाग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें आवश्यक दस्तावेज और सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा जाएगा। यदि मतदाता निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक प्रमाण और रिकॉर्ड प्रस्तुत कर देते हैं, तो उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिए जाएंगे।
समय पर दस्तावेज नहीं देने पर हट सकता है नाम
निर्वाचन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उन मामलों में ही मतदाता का नाम अंतिम सूची से हटाया जाएगा, जहां संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज या सही जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाएगा। यानी प्रत्येक मतदाता को अपनी जानकारी सुधारने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
31 जुलाई से शुरू होगी दावा और आपत्ति प्रक्रिया
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 31 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 31 जुलाई से 30 अगस्त तक मतदाता अपने नाम, पते, रिकॉर्ड या अन्य त्रुटियों को लेकर दावा और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। इस दौरान निर्वाचन विभाग सभी आवेदनों की जांच करेगा और आवश्यक सुधार करेगा।
सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 3 अक्टूबर को हरियाणा की अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य है कि अंतिम सूची पूरी तरह सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित हो, ताकि आगामी चुनावों में सभी पात्र मतदाता बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
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