Uttarakhand News: Congress को बड़ा झटका ! पूर्व CM ने सभी पदों से दिया इस्तीफा, जानें क्यों उठाया कदम?

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके सहयोगी पर लगे आरोपों के बीच रावत ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया और ठोस सबूत होने पर कार्रवाई की चुनौती दी। उनके इस्तीफे ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 12, 2026

Uttarakhand News: उत्तराखंड में  आगामी विधानसभा चुनाव से पहले  कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है कांग्रेस के दिग्गज नेता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। हरीश रावत के इस कदम से राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि चुनाव के इस दौर में या सियासी उठापटक के बीच हरीश रावत  को चुनाव से पहले  यह कठोर कदम उठाना पड़ा? क्या है ओएसडी चंदन सिंह जीना पर लगे आरोपों का सच? और क्यों हरीश रावत ने कह दिया कि ‘अगर मुझ पर ठोस सबूत हैं, तो कार्रवाई कीजिए’?

उत्तराखंड कांग्रेस को बड़ा झटका

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उत्तराखंड कांग्रेस को बड़ा झटका

उत्तराखंड कांग्रेस में मचे इस घमासान ने सबको हैरान कर दिया है। हरीश रावत ने यह ऐलान करके सनसनी फैला दी कि वे पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि,वे नहीं चाहते उनकी वजह से पार्टी किसी भी तरह से कमजोर हो।हरीश रावत का यह बयान इस बात का गवाह है कि,वे पार्टी के भीतर अपने विरोधियों और हालिया विवादों के बीच संगठन पर कोई आंच नहीं आने देना चाहते। लेकिन क्या यह सिर्फ एक त्याग है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक चाल छुपी हुई है?

चुनाव से पहले रावत का बड़ा दांव

उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत  का यह दांव मास्टरस्ट्रोक साबित होगा या पार्टी के लिए बड़ा झटका, यह आने वाला वक्त बताएगा।इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं हरीश रावत के ओएसडी चंदन सिंह जीना, जिन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। लेकिन हरीश रावत ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है।

अपने ऊपर लगे आरोपों को बताया निराधार

हरीश रावत ने कहा कि,उनके सहयोगियों को बेवजह घसीटा जा रहा है ताकि उनकी छवि को धूमिल किया जा सके।नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी के मुद्दों पर हरीश रावत ने जनता से अपील की है कि,अगर वाकई गड़बड़ियां हुईं हैं, तो जनता माफ करे। साथ ही उन्होंने यह भी चुनौती दी कि अगर किसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है, तो उन पर भी बिना झिझक कार्रवाई की जाए।अपने ऊपर लग रहे भ्रष्टाचार और नियुक्तियों में धांधली के आरोपों के बीच हरीश रावत ने अपनी पीठ खुद थपथपाई है। उन्होंने अपने 3 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल का लेखा-जोखा रखते हुए बड़ा दावा किया

कार्यकाल के दौरान सूबे के 42,000 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गईं

हरीश रावत ने कहा,जब पारदर्शी तरीके से युवाओं का भविष्य संवारा जा रहा था, तब विपक्ष ने किस तरह से रोड़े अटकाए, यह जनता भूली नहीं है।हरीश रावत ने साफ कर दिया कि उन्होंने हमेशा युवाओं के हितों को सर्वोपरि रखा है।

उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत का यह इस्तीफा कोई साधारण घटना नहीं है। यह आने वाले चुनावों और कांग्रेस पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बड़ा मोड़ है।

राज्य के मुख्यमंत्री रहते कई बड़े काम किए

उत्तराखंड में  ब्लॉक स्तर की राजनीति से उठकर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और फिर राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का उनका सफर हर किसी के लिए प्रेरणादायक रहा है। फरवरी 2014 से लेकर मार्च 2017 के बीच अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने पहाड़ी राज्य की रूपरेखा तय की।

केदारनाथ आपदा के समय बड़ी चुनौती का सामना

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केदारनाथ आपदा के समय बड़ी चुनौती का सामना

साल 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा के बाद राज्य की अर्थव्यवस्था और चारधाम यात्रा को दोबारा पटरी पर लाना सबसे बड़ी चुनौती थी। मुख्यमंत्री बनते ही हरीश रावत ने व्यक्तिगत रुचि लेकर युद्धस्तर पर केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाया और देश-दुनिया में यह संदेश दिया कि उत्तराखंड यात्रा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

मिड-डे मिल योजना में बड़ा बदलाव

स्कूली बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए उनके कार्यकाल में मिड-डे मील योजना के तहत मेनू में बड़ा बदलाव किया गया। बच्चों को सप्ताह में दो बार दूध, फल और अंडे या पौष्टिक विकल्प देने की अनूठी शुरुआत की गई, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई।

महिला सशक्तीकरण पर जोर

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय उत्पादों (जैसे मंडवा, झंगोरा, और पहाड़ी दालें) को बढ़ावा देने और पलायन की समस्या पर लगाम लगाने के लिए उन्होंने आजीविका बोर्ड का गठन किया। महिलाओं के स्व-सहायता समूहों (SHGs) को आर्थिक रूप से सशक्त करने पर उनका विशेष जोर था।

बुजुर्गों,विधवाओं के लिए सुविधाओं पर जोर

बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए चल रही पेंशन योजनाओं को सरल बनाते हुए दायरा बढ़ाया गया। पेंशन की राशि में बढ़ोतरी कर सीधे लाभार्थियों के खातों में डीबीटी (DBT) के जरिए भेजने की व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया।दुर्गम पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए ‘चलती-फिरती चिकित्सा वैन’ (मोबाइल मेडिकल यूनिट) और दूरदराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की तैनाती के लिए विशेष प्रोत्साहन भत्ते की शुरुआत की गई।

कांग्रेस पार्टी के भीतर बड़ी भूमिका रही

कांग्रेस पार्टी के भीतर हरीश रावत की भूमिका केवल एक राज्य के नेता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के सबसे बड़े ‘संकटमोचक’ और रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं।राज्य गठन के बाद से ही कांग्रेस पार्टी को जमीन पर जोड़े रखने में हरीश रावत की भूमिका सबसे अहम रही है। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं मंडल तक हर वर्ग और जाति में उनकी गहरी पैਠ मानी जाती है। जब भी पार्टी में अंदरूनी कलह या भितरघात की स्थिति आई, आलाकमान ने हमेशा रावत पर ही भरोसा जताया।

इंदिरा-राजीव गांधी के दौर से राजनीति में सक्रिय

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साल 2016 में जब उनकी ही पार्टी के कई विधायक बगावत कर गए और राज्य में राष्ट्रपति शासन तक लग गया, तब हरीश रावत ने कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर डटकर मुकाबला किया। कोर्ट की लड़ाई जीतकर अपनी सरकार की बहाली कराना उनके राजनीतिक कौशल का सबसे बड़ा उदाहरण था। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे रावत ने केंद्र सरकार में श्रम, कृषि, संसदीय कार्य और जल संसाधन जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। अन्य राज्यों में चुनावी प्रबंधन और राजनीतिक संकट सुलझाने के लिए भी कांग्रेस हाईकमान अक्सर उन्हीं पर निर्भर रहता है।

कांग्रेस के लिए उत्तराखंड की राह मुश्किल

भले ही राजनीतिक उठापटक और विरोधियों के चक्रव्यूह के कारण वे अपना कार्यकाल सुचारू रूप से पूरा नहीं कर पाए और 2017 के चुनाव में खुद की सीटें हार गए,, लेकिन आज भी उत्तराखंड की राजनीति हरीश रावत के इर्द-गिर्द ही घूमती है। कांग्रेस पार्टी के लिए वे आज भी एक ऐसा अनिवार्य स्तंभ हैं जिनके बिना उत्तराखंड में चुनावी रण जीतना नामुमकिन सा लगता है।