Goa News: गोवा डिजिटल अरेस्ट केस में बड़ा पर्दाफाश, ₹400 करोड़ की साइबर ठगी के नेटवर्क से 2 गिरफ्तार

गोवा डिजिटल अरेस्ट केस की जांच में ED को आखिर ऐसा क्या मिला कि 20 राज्यों तक फैले ₹400 करोड़ के साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया?

गोवा डिजिटल अरेस्ट केस में बड़ा पर्दाफाश

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 25, 2026

Goa News: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा में सामने आए एक कथित डिजिटल अरेस्ट मामले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, इस जांच के दौरान देशभर में सक्रिय एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पता चला है। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों पर 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 163 से अधिक FIR दर्ज हैं। इन मामलों में पीड़ितों को कुल 417.49 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने की बात सामने आई है।

Goa Congress Meeting: कांग्रेस की गोवा बैठक में वंदे मातरम पर विवाद, खरगे की

PMLA के तहत दो आरोपियों की गिरफ्तारी

ED ने फहीम मोइन हुसैन सईद और नईम मुईन सईद को Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को सोमवार को गोवा की अदालत में पेश किया गया।

यह कार्रवाई गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के आधार पर की गई। मामले में एक महिला को कथित डिजिटल अरेस्ट के जरिए डराकर करीब 2.6 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप है। यह घटना 21 मई 2025 से 2 जून 2025 के बीच हुई थी।

‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट’ के नाम पर ठगी

जांच के अनुसार, साइबर अपराधियों ने पीड़ित महिला को कथित तौर पर यह विश्वास दिलाया कि उसके पैसे किसी ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट’ में सुरक्षित रखने होंगे। इसी बहाने उससे रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई। ED के मुताबिक, ठगी से प्राप्त रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय एक व्यवस्थित मनी-लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया के तहत अलग-अलग खातों में घुमाया गया।

फर्जी कंपनियों के जरिए पैसे की लेयरिंग

ED ने बताया कि साइबर ठगी की रकम को बैंकिंग चैनल से निकालकर पहले नकदी और फिर विदेशी मुद्रा में बदलने के लिए एक संगठित व्यवस्था बनाई गई थी। इसमें RBI से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर कंपनियों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। जांच में यह भी पता चला कि कई कंपनियां ऐसे लोगों के नाम पर बनाई गई थीं, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इनमें कर्मचारी, ड्राइवर और छोटे घरों में रहने वाले लोग शामिल थे। उन्हें कागजों पर कंपनियों का डायरेक्टर दिखाया गया, जबकि वास्तविक नियंत्रण कथित तौर पर अन्य लोगों के हाथों में था।

कुछ घंटों में रकम कई खातों में ट्रांसफर

जानकारी के अनुसार, पीड़ितों से प्राप्त रकम कुछ ही घंटों के भीतर शुरुआती स्तर के निष्क्रिय या नए खुले बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी। इसके बाद रकम को 400 से अधिक लाभार्थी खातों में बांट दिया जाता था। जांच के दौरान कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेक्स कारोबार से जुड़ी कई संस्थाओं के बीच एक दूसरे से जुड़े नेटवर्क का पता चला। इन संस्थाओं के माध्यम से 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग लेनदेन किए जाने की बात सामने आई है।

2,904 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश जमा

ED के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े खातों में लगभग 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए। इसमें 61,448 बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीन (BNAM) ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 584.70 करोड़ रुपये जमा किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।

330 पीड़ितों की शिकायतें और 163 FIR

जांच एजेंसी के अनुसार, संबंधित कंपनियों के बैंक खातों के खिलाफ 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 330 पीड़ितों की शिकायतें दर्ज हैं। इन मामलों में कुल 163 FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी ने बताया कि 101 मामलों में एक ही पीड़ित की रकम नेटवर्क से जुड़ी दो या उससे अधिक कंपनियों के खातों में पहुंची।

Haryana News: प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में रैंडम टोकन सिस्टम लागू, वीआईपी

मुंबई और गोवा में छापेमारी

ED ने 17 जुलाई और 21 अगस्त को मुंबई और गोवा में 20 से अधिक ठिकानों पर PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने 3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त किए। इसके अलावा डिजिटल उपकरण, दस्तावेज, रिकॉर्ड और कानूनी रजिस्टर भी कब्जे में लिए गए हैं। ED के मुताबिक, जब्त सामग्री की जांच जारी है और इससे साइबर ठगी तथा कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की आगे की कड़ियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।