Rahul Gandhi Manusmriti Row: हिमंत सरमा का बड़ा हमला, बोले- महिला अधिकारों के चैंपियन नहीं राहुल गांधी

पश्चिम बंगाल बीजेपी में भ्रष्टाचार को लेकर प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलेगी। संगठन के किसी भी पदाधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित होने पर कार्रवाई की बात कही गई है। बयान से बंगाल बीजेपी में हलचल तेज है।

Rahul Gandhi Manusmriti Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 25, 2026

Rahul Gandhi Manusmriti Row: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के महिलाओं के अधिकार और मनुस्मृति से जुड़े बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह खुद को महिला अधिकारों और सशक्तीकरण का समर्थक बताते हैं, लेकिन उनके बयानों का इस्तेमाल हिंदू धर्म को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी से यह भी सवाल किया कि महिलाओं के अधिकारों की बात करते समय उन्होंने अन्य धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाओं में मौजूद पितृसत्तात्मक प्रथाओं के खिलाफ कितनी बार आवाज उठाई है।

मनुस्मृति पर राहुल के रुख को लेकर सवाल

हिमंत बिस्व सरमा ने अपने बयान में मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों से मनुस्मृति की आलोचना करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को व्यापक सामाजिक संदर्भ में किस तरह देखते हैं। सरमा का आरोप है कि महिला अधिकारों के सवाल को केवल हिंदू धर्म की आलोचना तक सीमित करना उचित नहीं है।

शरिया और मनुस्मृति की तुलना पर बहस

असम के मुख्यमंत्री ने मनुस्मृति और शरिया के बीच तुलना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शरिया इस्लामी न्यायशास्त्र से जुड़ी व्यवस्था है, जबकि मनुस्मृति को हिंदू धर्म में उसी तरह का सार्वभौमिक और बाध्यकारी धार्मिक कानून नहीं माना जाता। सरमा ने राहुल गांधी से सवाल किया कि यदि वह धार्मिक परंपराओं में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हैं, तो क्या वह सभी संबंधित व्यवस्थाओं और उनके सामाजिक संदर्भों पर समान रूप से बात करते हैं।

अलग धार्मिक परंपराओं के संदर्भ समझने की बात

सरमा ने जोर दिया कि मनुस्मृति और शरिया को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक, दोनों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, धार्मिक भूमिका और सामाजिक संदर्भ अलग-अलग हैं। इसलिए किसी भी धार्मिक या सामाजिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते समय उसके इतिहास और वर्तमान स्वरूप को ध्यान में रखना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों की बहस व्यापक और संतुलित होनी चाहिए।

हिंदू धर्म की बदलाव स्वीकार करने की क्षमता का दावा

हिमंत बिस्व सरमा ने हिंदू धर्म की विशेषता बताते हुए कहा कि इसकी सबसे बड़ी ताकत समय के साथ बदलने और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता रही है। उन्होंने दावा किया कि हिंदू समाज और उसकी परंपराएं हजारों वर्षों से सुधार और परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरती रही हैं। उनके अनुसार, सामाजिक बदलाव की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और परंपराओं के भीतर सुधार की गुंजाइश बनी रहेगी।

राहुल गांधी की राजनीतिक मंशा पर सवाल

असम के मुख्यमंत्री ने अपने बयान के अंत में राहुल गांधी की राजनीतिक मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हर हिंदू को यह विचार करना चाहिए कि महिलाओं के अधिकारों की बात करते हुए राहुल गांधी का वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य क्या है। सरमा ने आरोप लगाया कि महिला सशक्तीकरण के मुद्दे को हिंदू धर्म की आलोचना के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मनुस्मृति पर बयान से सियासी बहस तेज

राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता दिखाई दे रहा है। एक ओर कांग्रेस और राहुल गांधी महिलाओं के अधिकारों तथा सामाजिक समानता के मुद्दे उठा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता इसे हिंदू धर्म को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं। ऐसे में मनुस्मृति, महिला अधिकार और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

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