
Dussehra 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल का दशहरा उत्सव एक बिल्कुल नए और अनोखे विवाद के साथ सुर्खियों में आ गया है। इस बार रामलीला के पारंपरिक मंचन के दौरान रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतलों के साथ-साथ 30 फीट ऊंचा एक कॉकरोच का पुतला भी जलाए जाने की योजना बनाई गई है। इस अनूठी और चौंकाने वाली पहल ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने व्यंग्य करते हुए आयोजकों को इस अनोखे तरीके से ‘मुफ्त में प्रचार’ करने के लिए धन्यवाद दिया है।
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अभिजीत दिपके और सीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया

दिल्ली में चल रहे इस गरमागरम विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मंगलवार को मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुफ्त में हमारी पार्टी का प्रचार करने के लिए आयोजकों का बहुत-बहुत धन्यवाद। वहीं दूसरी ओर, सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम और रामलीला मंचन में कॉकरोच का पुतला शामिल करने की योजना को पूरी तरह से एक ‘तमाशा’ करार दिया है। संगठन का मानना है कि इस तरह के प्रयोग धार्मिक और पारंपरिक आयोजनों की गरिमा के अनुकूल नहीं हैं।
कॉकरोच का पुतला जलाने के पीछे क्या है आयोजकों की वजह?

दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में हर साल भव्य रामलीला का आयोजन करने वाली ‘श्री केशव रामलीला समिति’ ने इस अनोखे फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट की है। समिति का कहना है कि पुतले के रूप में जलाया जाने वाला यह 30 फीट ऊंचा कॉकरोच समाज में फैली गंदगी, भ्रष्टाचार और मानसिक मैल का प्रतीक होगा। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘स्वच्छ दिल्ली’ के संकल्प के तहत जनता के बीच साफ-सफाई और स्वच्छता का एक मजबूत संदेश देना है।
समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल ने इन तमाम चर्चाओं पर सफाई देते हुए स्पष्ट किया है कि इस पूरे फैसले के पीछे किसी भी प्रकार की कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। उनका तर्क है कि विजयादशमी के पर्व पर बुराई और गंदगी पर अच्छाई और स्वच्छता की जीत के संदेश को रेखांकित करने के लिए ही इस अनूठे प्रयोग को चुना गया है।
सीजेपी के विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

यह पूरा वाकया ऐसे समय में सामने आया है, जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इससे पहले सीजेपी ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए आंदोलनों में भी यह संगठन काफी सक्रिय रूप से शामिल रहा है।
जैसे ही रामलीला में कॉकरोच का पुतला जलाने की खबर सोशल मीडिया पर फैली, वैसे ही इस पर आम जनता और यूजर्स के बीच तीखी बहस छिड़ गई। एक तरफ जहां कुछ लोगों ने धार्मिक और पौराणिक आयोजनों में इस प्रकार के आधुनिक और प्रतीकात्मक पुतलों के इस्तेमाल की प्रासंगिकता और औचित्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स ने यह आरोप भी लगाया है कि मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों और विरोध प्रदर्शनों को त्योहार के पारंपरिक स्वरूप के साथ जानबूझकर जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इस बीच समाज के एक बड़े वर्ग ने स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने वाले इस अनोखे और साहसिक कदम का खुलकर समर्थन भी किया है।
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