Diego Maradona Death : फुटबॉल की दुनिया के बेताज बादशाह डिएगो अरमांडो माराडोना को हमसे बिछड़े साढ़े पांच साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन उनकी मृत्यु से जुड़े सवाल आज भी उतने ही गहरे हैं। क्या 25 नवंबर 2020 को हुआ उनका निधन महज एक प्राकृतिक घटना थी, या इसके पीछे चिकित्सा जगत की अक्षम्य लापरवाही छिपी थी? इस गुत्थी को सुलझाने के लिए अर्जेंटीना के सैन इसिड्रो में कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। पिछले कई प्रयासों के विफल होने के बाद, अब दुनिया भर की नजरें इस नए ट्रायल पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि ‘गोल्डन बॉय’ के अंतिम दिनों में असल में क्या हुआ था।
विवादास्पद जीवनशैली और इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप
माराडोना का जीवन जितना मैदान पर शानदार था, मैदान के बाहर उतना ही चुनौतीपूर्ण रहा। उनकी अनियंत्रित जीवनशैली और स्वास्थ्य समस्याओं ने उन्हें अक्सर अस्पतालों के चक्कर लगाने पर मजबूर किया। उनकी मृत्यु के तुरंत बाद, उनके परिवार और वकीलों ने चिकित्सकीय प्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई। आरोप लगाया गया कि जिस दिग्गज खिलाड़ी की देखभाल के लिए 20 डॉक्टरों की टीम तैनात थी, उन्हें वह बुनियादी इलाज भी नहीं मिला जो उनकी जान बचा सकता था। फुटबॉल समुदाय में यह धारणा प्रबल है कि यदि प्रोटोकॉल का पालन किया जाता, तो 1986 के विश्व कप नायक आज हमारे बीच होते।
जज का विवाद और ट्रायल में देरी: पारदर्शिता पर उठे सवाल
न्याय की यह डगर काफी पथरीली रही है। मार्च 2022 में शुरू हुई जांच प्रक्रिया को उस समय बड़ा झटका लगा, जब मई 2025 में ट्रायल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। पता चला कि केस की मुख्य जज, जूलियट मैकिन्टोश, स्वयं माराडोना की मृत्यु पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा थीं। हितों के इस टकराव (Conflict of Interest) के कारण न केवल जज को हटाया गया, बल्कि पूरे ट्रायल को रद्द कर दिया गया। इस घटनाक्रम की वजह से न्याय मिलने में लगभग एक साल की और देरी हुई, जिससे प्रशंसकों और परिवार की हताशा बढ़ गई।
सात चिकित्साकर्मियों पर हत्या का आरोप: क्या होगी जेल?
अब जब ट्रायल दोबारा शुरू हो रहा है, तो अभियोजन पक्ष पूरी तैयारी के साथ मैदान में है। इस मामले में लगभग 120 नए गवाहों की गवाही दर्ज की गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डॉक्टरों और नर्सों सहित सात लोगों पर ‘जानबूझकर हत्या’ (Simple Homicide) का आरोप लगाया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सात लोग दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 8 से 25 साल तक की सख्त जेल की सजा हो सकती है। अभियोजन का तर्क है कि माराडोना को एक ऐसे अस्वास्थ्यकर माहौल में रखा गया था, जहाँ उनकी मृत्यु निश्चित थी।
ड्रग्स की लत बनाम मेडिकल लापरवाही: अदालती जंग का आखिरी पड़ाव
मामले का दूसरा पक्ष भी उतना ही मुखर है। आरोपी डॉक्टरों और उनके बचाव पक्ष का दावा है कि माराडोना की मृत्यु उनकी पुरानी बीमारियों और ड्रग्स की लत के कारण हुई एक ‘प्राकृतिक मौत’ थी। उनका कहना है कि चिकित्सा टीम ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया, लेकिन मरीज की शारीरिक स्थिति पहले ही बहुत नाजुक हो चुकी थी। दूसरी तरफ, माराडोना का परिवार इसे स्पष्ट रूप से ‘मेडिकल मर्डर’ करार दे रहा है। यह ट्रायल जुलाई 2026 तक चलने की उम्मीद है, और उम्मीद की जा रही है कि इस बार ‘हैंड ऑफ गॉड’ के रचयिता को वह अंतिम न्याय मिल सकेगा, जिसका इंतजार पूरी दुनिया कर रही है।









