Devendra Nath Mahto: झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य के युवाओं और छात्रों का रोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में इन दिनों हजारों की संख्या में छात्र डटे हुए हैं और न्याय की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अपनी मांगों के समर्थन में पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। लंबी भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ा है, जिसके चलते उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।
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डॉक्टरों की चिंता: ब्लड प्रेशर और डिहाइड्रेशन बना बड़ा खतरा
अस्पताल में भर्ती छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के स्वास्थ्य की नियमित जांच कर रहे चिकित्सा अधिकारियों ने उनकी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉक्टर हाफिज अली ने मीडिया को उनकी हेल्थ अपडेट देते हुए बताया कि देवेंद्र नाथ महतो का ब्लड प्रेशर (बीपी) बेहद असंतुलित चल रहा है।
डॉ. अली के मुताबिक, जब तक उन्हें ग्लूकोज या अन्य जरूरी तरल पदार्थ (फ्लूइड) दिए जाते हैं, तब तक उनका बीपी कुछ हद तक सामान्य बना रहता है। लेकिन जैसे ही फ्लूइड चढ़ाना बंद किया जाता है, उनका रक्तचाप फिर से तेजी से नीचे गिरने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति चिकित्सीय रूप से काफी संवेदनशील है, जिसके लिए चौबीसों घंटे उनकी निगरानी करना अनिवार्य हो गया है।
जांच में सामने आई डिहाइड्रेशन और कमजोरी की समस्या
देवेंद्र नाथ महतो की मेडिकल जांच रिपोर्ट में मुख्य रूप से गंभीर डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की भारी कमी) की समस्या सामने आई है। लंबे समय तक अन्न और जल का त्याग करने के कारण उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है।
कमजोरी और चक्कर: शरीर में डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी के कारण उन्हें अत्यधिक कमजोरी, बदन दर्द और उठने-बैठने पर चक्कर आने जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टरी सलाह: चिकित्सकों ने उन्हें लगातार ओआरएस (ORS) और पर्याप्त मात्रा में अन्य तरल पदार्थ लेने की सलाह दी है, ताकि शरीर में पानी के स्तर को सुधारा जा सके और बीपी को स्थिर रखा जा सके।
यूरिन में कीटोन बॉडीज मिलने से बढ़ा जोखिम
डॉक्टर हाफिज अली ने खुलासा किया कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले या शुरुआती जांच के दौरान देवेंद्र के यूरिन (मूत्र) में कीटोन बॉडीज पाई गई थीं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक भूखा रहता है या स्टार्वेशन (भुखमरी) की स्थिति से गुजरता है, तो शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अंदरूनी जमा हुए फैट को बर्न करने लगता है, जिससे यूरिन में कीटोन बॉडीज बनने लगती हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि लंबे समय से जारी इस अनशन ने उनके आंतरिक अंगों और स्वास्थ्य पर गहरा आघात पहुंचाया है।
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