Tushar Mehta on CJP Protest: दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की जा रही कथित वीडियोग्राफी और निगरानी को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (JNUSU) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष द्वारा दायर इस याचिका में पुलिस निगरानी की वैधता के साथ-साथ नागरिकों के निजता के अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ कर रही है।
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की कड़ी दलीलें
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने याचिका पर अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस जनहित याचिका की विचारणीयता (Maintainability) को लेकर सरकार की स्पष्ट प्रारंभिक आपत्तियां हैं।
सुरक्षा के लिए वीडियोग्राफी जरूरी: प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की जाने वाली वीडियोग्राफी और निगरानी का बचाव करते हुए एसजी ने दलील दी कि जब किसी सार्वजनिक स्थल पर भारी भीड़ जमा होती है और किसी भी अप्रिय या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होती है, तो सुरक्षा और साक्ष्य संकलन के दृष्टिकोण से रिकॉर्डिंग करना बेहद अनिवार्य हो जाता है। यह प्रक्रिया केवल एक विशेष प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि हर बड़े आयोजन में अपनाई जाती है।
सार्वजनिक स्थल पर निजता का दावा असंगत: निजता के अधिकार के उल्लंघन के दावों को सिरे से खारिज करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि सार्वजनिक प्रदर्शन स्थलों पर निजता की बात करना एक विडंबना है। उन्होंने अदालत को बताया कि आज के इस आधुनिक युग में प्रदर्शन स्थलों पर मीडियाकर्मी इंटरव्यू ले रहे होते हैं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स व यूट्यूबर लगातार रील बना रहे होते हैं। ऐसे खुले और सार्वजनिक माहौल में कानून-व्यवस्था बनाए रखना ‘वैध सरकारी हित’ (Legitimate State Interest) के अंतर्गत आता है और यह पूरी तरह से जायज है।
याचिकाओं को जोड़ने के सुझाव पर याचिकाकर्ता की आपत्ति
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने एक प्रशासनिक और न्यायिक सुझाव देते हुए कहा कि पुलिस की कथित हिंसा और निगरानी से जुड़ी अन्य याचिकाएं पहले से ही 11 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। चूंकि इन मामलों का मूल उद्देश्य लगभग एक जैसा है, इसलिए इस नई याचिका को भी उसी दिन अन्य संबंधित मामलों के साथ सुना जा सकता है।
हालांकि, याचिकाकर्ता आइशी घोष की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने इस सुझाव पर असहमति जताई। उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि यह याचिका तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और मूल मुद्दों (Essence) के मामले में अन्य मामलों से पूरी तरह से अलग है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए इस पर अलग से नोटिस जारी किया जाना चाहिए।
सुनवाई अधूरी, अब सोमवार को होगी आगे की बहस
अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को बहुत विस्तार से सुना, लेकिन लंबी और विस्तृत बहस के बावजूद शुक्रवार को सुनवाई किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के कानूनी पहलुओं पर अदालत का प्रारंभिक दृष्टिकोण तय करने के लिए दोनों पक्षों को और गहराई से सुने जाने की आवश्यकता है। पीठ ने आदेश पारित करते हुए मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। अब नागरिकों के अधिकारों और सरकारी सुरक्षा दायित्वों के इस महत्वपूर्ण संतुलन पर सोमवार को अगली विस्तृत सुनवाई होगी।










