Rashid Alvi On Sonam Wangchuk CJP Protest: वांगचुक के अनशन टूटने के बाद कांग्रेस के पूर्व सांसद का दावा, सियासत गरमाई

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बने माहौल को देखते हुए उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

Rashid Alvi On Sonam Wangchuk CJP Protest

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 24, 2026

Rashid Alvi On Sonam Wangchuk CJP Protest: प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक द्वारा अपना अनशन तोड़े जाने के बाद राजनीति गरमा गई है। हालांकि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों का प्रदर्शन अभी भी लगातार जारी है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अल्वी ने दावा किया कि सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल के भीतर एक तरह से नजरबंद (जेल में) रखा गया था। उन्होंने कहा कि जब वे खुद वांगचुक से मिलने अस्पताल गए थे, तो पुलिस ने उन्हें मिलने नहीं दिया। इसके अलावा, मेदांता अस्पताल में भी उनकी पत्नी को यह गंभीर आशंका रही कि कहीं उन्हें कोई गलत दवा न दे दी जाए। राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि इसके पीछे एक बड़ी साजिश थी और वांगचुक का उपवास पूरी तरह से धोखा देकर, डराकर और भारी दबाव बनाकर जबरन तुड़वाया गया है।

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‘धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा की कोई बुनियादी जानकारी नहीं’

कांग्रेस नेता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला और उनके इस्तीफे की पुरजोर मांग की। अल्वी ने कहा कि देश का आज जो माहौल और संकटपूर्ण स्थिति बनी हुई है, उसे देखते हुए शिक्षा मंत्री को खुद ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

क्षमता पर सवाल: राशिद अल्वी ने कड़े शब्दों में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा विभाग की कोई बुनियादी जानकारी नहीं है और वे इस पद के लिए सक्षम नहीं हैं।

छात्रों का भविष्य दांव पर: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवा इस देश का भविष्य हैं, और उनका करियर पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि देश की शिक्षा नीति और शिक्षा मंत्री कितने योग्य हैं।

पीएम मोदी के बयानों और संसद की गरिमा पर तंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में जारी किए गए वीडियो संदेश पर मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी का समर्थन करते हुए राशिद अल्वी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब संसद का सत्र चल रहा होता है, तो देश या नीति से जुड़ा कोई भी अहम बयान सबसे पहले संसद के पटल पर दिया जाना चाहिए और संसद को विश्वास में लिया जाना चाहिए।

अल्वी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संसद के सदस्यों को नीचा दिखाना चाहते हैं और उनकी कोई इज्जत नहीं करना चाहते, इसीलिए वे संसद के भीतर जाने के बजाय हमेशा बाहर बयान जारी करते हैं। उन्होंने कहा कि संसद के सत्र के दौरान बाहर बयान देना सदन की गरिमा के खिलाफ है और इससे देश का लोकतंत्र लगातार कमजोर हो रहा है।

‘बीजेपी ने लगा रखा है जनता विरोधी चश्मा’

भाजपा द्वारा इस पूरे आंदोलन को विपक्ष की साजिश बताए जाने और प्रदर्शनकारियों को छात्र न माने जाने के दावों पर अल्वी ने तीखा पलटवार किया।

ऐतिहासिक उदाहरण: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब किसान सड़कों पर बैठे थे तब भी बीजेपी उन्हें बाहरी बताती थी, शाहीन बाग में विरोध के दौरान मुसलमानों को पाकिस्तानी करार दिया जाता था, और अब वे कह रहे हैं कि ये स्टूडेंट्स नहीं हैं।

पड़ोसी देशों की चेतावनी: अल्वी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम इस बात गवाह हैं कि युवाओं के आक्रोश ने बड़े-बड़े तख्तापलट कर दिए हैं। बीजेपी सरकार को इन हालातों से सीख लेनी चाहिए।

देश में लोकतंत्र का ह्रास: जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि तानाशाही सरकारों का मुख्य हथियार पुलिस और सेना का दुरुपयोग करना होता है। जब सरकारें जनता को दुश्मन मान लेती हैं, तो यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण होता है कि देश के भीतर लोकतंत्र का पतन हो रहा है।

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