Tata Trusts: टाटा संस में बड़ा विवाद, एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को टाटा ट्रस्ट्स ने बताया ‘गैरकानूनी’

टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा चेयरमैन नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। बोर्ड के 4:1 फैसले के बाद टाटा ट्रस्ट्स ने प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाया है। ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी के Articles of Association के तहत उसके नामित निदेशकों का जरूरी समर्थन नहीं मिला। मामला अब कॉरपोरेट गवर्नेंस के केंद्र में है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 20, 2026

Tata Trusts: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में चेयरमैन पद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया, लेकिन कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया। ट्रस्ट्स ने बोर्ड के निर्णय को कानूनी तौर पर अमान्य बताते हुए कहा कि नियुक्ति के लिए जरूरी शर्त पूरी नहीं हुई।

एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट्स की आपत्ति

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बताते चले कि, टाटा ट्रस्ट्स की ओर से रविवार को जारी बयान में कहा गया कि टाटा संस के एसोसिएशन के नियमों के मुताबिक चेयरमैन की नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों का सकारात्मक समर्थन जरूरी है। ट्रस्ट्स का दावा है कि बोर्ड की बैठक में यह आवश्यक सहमति नहीं मिली। ऐसे में बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव को ट्रस्ट्स ने प्रभावी मानने से इनकार कर दिया है।

4:1 वोटिंग पर टाटा ट्रस्ट्स ने खारिज किया बोर्ड का तर्क

टाटा संस बोर्ड की बैठक में एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव 4:1 के वोट से पारित हुआ था। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि केवल बहुमत के आधार पर इस फैसले को वैध नहीं माना जा सकता। ट्रस्ट्स ने बोर्ड की ओर से ‘कास्टिंग वोट’ के इस्तेमाल से जुड़े तर्क पर भी सवाल उठाया है और कहा है कि कंपनी के नियमों में इस मामले को लेकर अलग प्रावधान हैं।

‘कास्टिंग वोट’ और बोर्ड बहुमत को लेकर क्या है विवाद?

टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक अध्यक्ष का कास्टिंग वोट उस स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है जब बोर्ड में मत बराबर हो जाएं। लेकिन ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों से जुड़े विशेष मतदान अधिकारों को सामान्य बोर्ड वोटिंग के बराबर नहीं माना जा सकता। ट्रस्ट्स का तर्क है कि मतदान का परिणाम 4:1 हो या कोई अन्य संख्या, यदि जरूरी सकारात्मक समर्थन नहीं मिला है तो संबंधित शर्त पूरी नहीं मानी जाएगी।

टाटा संस बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशक

टाटा ट्रस्ट्स ने अपने बयान में कहा कि टाटा संस के बोर्ड में उसके दो नामित निदेशक हैं। ट्रस्ट्स के अनुसार, इन दोनों में से केवल एक निदेशक का समर्थन प्रस्ताव के लिए पर्याप्त नहीं है। एक नामित निदेशक ने एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था। ट्रस्ट्स का कहना है कि इस वजह से एसोसिएशन के नियमों के तहत जरूरी सकारात्मक समर्थन उपलब्ध नहीं हुआ।

साइरस मिस्त्री केस का हवाला देकर टाटा ट्रस्ट्स का तर्क

टाटा ट्रस्ट्स ने अपने दावे के समर्थन में टाटा संस और साइरस मिस्त्री के बीच पुराने कानूनी विवाद का भी उल्लेख किया। ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के एसोसिएशन के नियमों में नामित निदेशकों को मिले ‘Affirmative Voting Rights’ को पहले कंपनी खुद सुप्रीम कोर्ट के सामने सही ठहरा चुकी है। ट्रस्ट्स के मुताबिक उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी टाटा संस की दलीलों और संबंधित प्रावधानों को मान्यता दी थी।

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के पुराने रुख पर उठाया सवाल

टाटा ट्रस्ट्स का तर्क है कि जिन नियमों और अधिकारों का टाटा संस ने साइरस मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बचाव किया था, उन्हीं प्रावधानों को अब अलग तरीके से नहीं देखा जा सकता। ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी अपने हित या परिस्थिति के अनुसार उन नियमों को नजरअंदाज नहीं कर सकती।

एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल और टाटा समूह में नया विवाद

एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर सामने आया यह विवाद टाटा संस के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच अधिकारों तथा कंपनी के संवैधानिक दस्तावेजों की व्याख्या से जुड़ा है। एक ओर बोर्ड ने पांच साल के नए कार्यकाल के लिए प्रस्ताव पारित किया है, जबकि दूसरी ओर टाटा ट्रस्ट्स ने आवश्यक मतदान समर्थन नहीं मिलने का हवाला देते हुए इसकी वैधता पर सवाल खड़ा किया है। अब आगे की प्रक्रिया में कंपनी के नियमों और संबंधित कानूनी प्रावधानों की व्याख्या महत्वपूर्ण होगी।