Bhopal Farmers Protest: भोपाल में किसान आंदोलन तेज, दो मांगों को लेकर सरकार से आर-पार की लड़ाई

भोपाल में किसान आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च, मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर किसान सरकार के खिलाफ डटे हैं। क्या बातचीत से निकलेगा समाधान या आंदोलन और उग्र होगा? जानिए पूरी रिपोर्ट।

भोपाल में किसान आंदोलन तेज

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 29, 2026

Bhopal Farmers Protest: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। किसान क्रांति पैदल यात्रा के तहत बड़ी संख्या में किसान भोपाल पहुंच चुके हैं और अब मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च की तैयारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा किसान भी शामिल हैं, जिससे यह प्रदर्शन अलग पहचान बना रहा है।

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मुख्यमंत्री आवास की ओर किसानों का कूच

बुधवार को किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का ऐलान किया है। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण उन्होंने राजधानी में डटे रहने और अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला लिया है।

सरकार से बातचीत बेनतीजा रही

मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश की। हालांकि कई दौर की चर्चा के बाद भी कोई सहमति नहीं बन सकी। किसानों का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित निर्णय चाहिए। इसी वजह से आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया।

मूंग खरीदी और खाद वितरण बना मुख्य मुद्दा

किसानों का आरोप है कि सरकार ने पहले मूंग की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन अब उपज खरीदने में पीछे हट रही है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई किसानों को प्रति एकड़ हजारों रुपये का घाटा हो रहा है।

इसके साथ ही खाद वितरण में लागू टोकन व्यवस्था को भी किसान बड़ी समस्या बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती, जिससे खेती प्रभावित होती है।

आठ मांगें, लेकिन दो पर सबसे ज्यादा जोर

किसान संगठनों ने सरकार के सामने कुल आठ मांगें रखी हैं, लेकिन फिलहाल दो प्रमुख मुद्दों पर तत्काल फैसला चाहते हैं।

  • मूंग की फसल की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए।
  • खाद वितरण में लागू टोकन प्रणाली समाप्त कर किसानों को सरल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

किसानों का कहना है कि इन दोनों मांगों के पूरा होने से बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिलेगी।

युवा किसानों की बड़ी भागीदारी

इस आंदोलन की सबसे खास बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में युवा और नई पीढ़ी के किसान शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेती से जुड़े मुद्दों को लेकर युवा अब खुलकर सामने आ रहे हैं और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक क्षेत्र का आंदोलन नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य और कृषि व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है।

25 दिनों से जारी है आंदोलन

भोपाल पहुंचने से पहले किसान लगभग 25 दिनों तक अपने-अपने जिला मुख्यालयों पर धरना देते रहे। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके बाद उन्होंने राजधानी में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। इस आंदोलन में नर्मदापुरम और आसपास के कई जिलों से किसान शामिल हुए हैं।

सड़क पर ही डाला डेरा

राजधानी पहुंचने के बाद किसानों ने सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। रात में उन्होंने वहीं भोजन तैयार किया और आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे लंबे समय तक यहीं रहकर आंदोलन करेंगे।

प्रदर्शन के चलते ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित

किसान आंदोलन को देखते हुए भोपाल में कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किए हैं और ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। साथ ही एहतियात के तौर पर शहर के कुछ स्कूलों में अवकाश भी घोषित किया गया है।

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सरकार और किसानों के बीच समाधान की उम्मीद

फिलहाल किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं, जबकि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच फिर से बातचीत हो सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वार्ता से समाधान निकलेगा या आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।