Ram Temple donation controversy: योगी सरकार ने गठित की 3 सदस्यीय SIT, आरोपी कर्मी के घर छापेमारी में लाखों बरामद

अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले में योगी सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है, जो 7 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी। पुलिस और ट्रस्ट की छापेमारी में आरोपी कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से 10-12 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। वहीं, निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस पूरे विवाद पर चुप्पी साध ली है।

Ram Temple donation controversy

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 13, 2026

Ram Temple donation controversy: अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्रों से चढ़वे की राशि चोरी होने के मामले को उत्तर प्रदेश शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पत्र लिखे जाने के बाद, शासन ने शनिवार देर शाम एक उच्च स्तरीय त्रि-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया। इस जांच टीम में विशेष सचिव (वित्त) नील रतन, मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत और आईजी रेंज लखनऊ किरन एस जैसी बड़ी हस्तियों को शामिल किया गया है।

सात दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों में आएगी फाइनल रिपोर्ट

प्रशासन द्वारा गठित की गई यह हाई-प्रोफाइल एसआईटी (SIT) अपनी जांच को सुपरफास्ट ट्रैक पर चलाने वाली है। शासन के कड़े निर्देशों के अनुसार, टीम को अपनी पहली प्रारंभिक जांच रिपोर्ट महज 7 दिनों के भीतर सौंपनी होगी, जबकि पूरे मामले की विस्तृत फाइनल रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर पेश करनी होगी। साक्ष्यों को कब्जे में लेने, ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बयान दर्ज करने और पकड़े गए संदिग्धों से गहन पूछताछ करने के लिए एसआईटी की टीम रविवार को ही अयोध्या पहुंच सकती है।

आरोपी के ठिकाने पर पुलिसिया कार्रवाई

राम मंदिर चंदे की राशि के गबन से जुड़े इस मामले में करीब एक हफ्ते से ट्रस्ट और स्थानीय पुलिस गोपनीय ढंग से छानबीन कर रही थी। इसी कड़ी में पुलिस और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की मौजूदगी में रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में स्थित आरोपी कर्मी लवकुश मिश्रा के घर पर बड़ी छापेमारी की गई। जांच एजेंसियों ने आरोपी के घर का ताला तोड़कर वहां से करीब 10 से 12 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। ग्रामीणों में यह भी चर्चा है कि कुछ रकम कूड़े के ढेर (घूर) में छिपाई गई थी, जिसे पुलिस ने ढूंढ निकाला।

परिजनों का स्पष्टीकरण और दावे

27 वर्षीय आरोपी लवकुश मिश्रा पिछले 5-6 महीनों से मंदिर में कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। इस छापेमारी और पैसों की बरामदगी पर उसके पिता बच्चूलाल ने अपनी सफाई पेश की है। गाजियाबाद में रह रहे बच्चूलाल ने बताया कि उन्हें इस नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और ट्रस्ट के लोग खुद उनके घर से यह पैसा लेकर गए हैं। फैजाबाद में बन रहे नए मकान को लेकर उन्होंने दावा किया कि इस निर्माण से उनके बेटे का कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि उन्होंने अपनी 10-12 बीघा जमीन गिरवी रखकर कर्ज लेकर यह घर बनवाया है।

नृपेंद्र मिश्र ने दान पात्र विवाद पर तोड़ी चुप्पी

इस पूरे घपले और सियासी घमासान के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र शनिवार को अयोध्या पहुंचे। हवाई अड्डे पर जब मीडिया ने उनसे दान राशि की हेराफेरी और चल रही पुलिसिया तफ्तीश को लेकर सवाल पूछे, तो उन्होंने इस विवाद से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया। उन्होंने बेहद संक्षिप्त और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं और कुछ नहीं।”

मंदिर परिसर में कार्यों की समीक्षा

दान विवाद पर टिप्पणी करने से साफ इनकार करने के बाद नृपेंद्र मिश्र सीधे राम जन्मभूमि परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने मंदिर में चल रहे शेष निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने सुरक्षा बाउंड्री वॉल, नए ट्रस्ट कार्यालय, श्रद्धालु विश्रामालय और शंकराचार्य द्वार जैसी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की। इस उच्च स्तरीय बैठक में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव और मुख्य आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत कई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहे।