Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट समेत कुल 11 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। उत्तर प्रदेश में इन सीटों का मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। ऐसे में चुनाव के बाद राज्यसभा में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरण में बदलाव देखने को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 31 सीटें हैं।
यूपी राज्यसभा चुनाव में बीजेपी, सपा और बसपा की मौजूदा स्थिति

बताते चले कि, मौजूदा समीकरण के मुताबिक चुनाव के दायरे में आने वाली 10 सीटों में बीजेपी के पास आठ, समाजवादी पार्टी के पास एक और बहुजन समाज पार्टी के पास एक सीट है। बीजेपी के जिन नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं। डॉ. दिनेश शर्मा की सीट भी इस चुनाव में शामिल है, क्योंकि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
रामगोपाल यादव और रामजी गौतम का कार्यकाल भी होगा पूरा
राज्यसभा की इन सीटों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम की सीट भी शामिल है। रामजी गौतम नवंबर 2020 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे और उनका कार्यकाल भी इसी अवधि में समाप्त होना है।
यूपी विधानसभा में बसपा का कोई विधायक नहीं
राज्यसभा चुनाव से पहले बसपा की विधानसभा में स्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में बसपा के पास अब कोई विधायक नहीं है। रसड़ा से पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है। उमाशंकर सिंह तीन बार रसड़ा से विधायक रहे थे और 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के एकमात्र निर्वाचित विधायक बने थे।
उमाशंकर सिंह के निधन से बदला बसपा का चुनावी समीकरण

उमाशंकर सिंह के निधन के बाद रसड़ा विधानसभा सीट रिक्त है। उनके निधन से बसपा को विधानसभा में अपना एकमात्र निर्वाचित प्रतिनिधि भी खोना पड़ा है। ऐसे समय में जब राज्यसभा की एक सीट के लिए विधानसभा सदस्यों के वोट महत्वपूर्ण होते हैं, बसपा के सामने अपने मौजूदा राज्यसभा प्रतिनिधित्व को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
397 विधायकों के मतदान से तय होगा राज्यसभा का गणित
403 सदस्यीय विधानसभा में छह सीटें फिलहाल रिक्त होने की स्थिति में हैं, इसलिए उपलब्ध सदस्यों के आधार पर राज्यसभा चुनाव का गणित तय होगा। राज्यसभा चुनाव में विधायक अपने मतों के जरिए उम्मीदवारों का निर्वाचन करते हैं। उत्तर प्रदेश में एक सीट के लिए आवश्यक मतों की संख्या चुनाव में उपलब्ध प्रभावी विधानसभा सदस्य संख्या और लागू निर्वाचन नियमों के आधार पर तय होती है। इसलिए अंतिम गणित उम्मीदवारों और उस समय विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या पर निर्भर करेगा।
बसपा के सामने राज्यसभा सीट बचाने की चुनौती
बसपा की विधानसभा में मौजूदा समय में कोई सदस्य नहीं होने के कारण रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी के सामने राज्यसभा में भी अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखने की चुनौती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा केवल रसड़ा सीट जीत पाई थी, लेकिन उमाशंकर सिंह के निधन के बाद पार्टी की विधानसभा में संख्या शून्य हो गई।
मायावती की पार्टी के लिए राज्यसभा चुनाव क्यों अहम

बसपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी का विधानसभा में प्रतिनिधित्व पहले ही समाप्त हो चुका है। ऐसे में राज्यसभा की एक सीट भी उसके राष्ट्रीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि पार्टी इस सीट को बरकरार नहीं रख पाती है, तो संसद के उच्च सदन में भी उसका मौजूदा प्रतिनिधित्व समाप्त हो सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति चुनाव परिणाम और निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
राज्यसभा चुनाव से पहले यूपी में तेज होगा सियासी मंथन
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह राज्यसभा चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जा रहा है। बीजेपी, सपा और अन्य दलों को अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में विधानसभा के मौजूदा संख्या बल का हिसाब लगाना होगा। वहीं बसपा के लिए विधानसभा और राज्यसभा, दोनों स्तरों पर अपने प्रतिनिधित्व को लेकर यह चुनाव विशेष महत्व रखता है। चुनाव के नतीजों के बाद राज्यसभा में यूपी के राजनीतिक समीकरण की तस्वीर और साफ होगी।










