Uttarakhand News: माउंटेन वॉरफेयर में माहिर होंगी भारत-अमेरिका की सेनाएं, औली में शुरू हुआ मेगा मिलिट्री अभ्यास

औली के दुर्गम और बर्फीले पहाड़ों के बीच भारत और अमेरिका की सेनाओं ने एक ऐसे मेगा मिलिट्री अभ्यास का आगाज किया है, जिससे सामरिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आखिर इस खूफिया और आधुनिक तकनीक से लैस युद्धाभ्यास के जरिए दोनों महाशक्तियां किस छिपे हुए खतरे से निपटने की खतरनाक तैयारी कर रही हैं?

माउंटेन वॉरफेयर में माहिर होंगी भारत-अमेरिका की सेनाएं

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

सितम्बर 16, 2026

Uttarakhand News: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित औली एक बार फिर भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग का प्रमुख केंद्र बना है। औली स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में मंगलवार को भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास के 22वें संस्करण का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस अभ्यास में दोनों देशों के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण पर्वतीय और अर्धपर्वतीय इलाकों में संयुक्त सैन्य अभियानों की क्षमता को मजबूत करना है। प्रशिक्षण के दौरान सैनिकों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अभियान संचालित करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अभ्यास कराया जाएगा।

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दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने किया संबोधन

उद्घाटन कार्यक्रम में अमेरिकी सेना की 14वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन और 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन ने प्रतिभागी सैनिकों को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य दलों के बीच बेहतर समन्वय, प्रशिक्षण और संयुक्त अभियानों के महत्व पर जोर दिया गया। अभ्यास को दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर अनुभव साझा करने और आपसी समझ विकसित करने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

औली के साथ राजस्थान में भी होगा अभ्यास

भारत-अमेरिका का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास केवल औली तक सीमित नहीं है। इसका एक हिस्सा राजस्थान स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी आयोजित किया जा रहा है। महाजन रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों और सैन्य क्षमताओं से जुड़े अभ्यास किए जाएंगे। वहीं औली के चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भूभाग में सैनिकों को पर्वतीय युद्ध और पैदल सेना आधारित अभियानों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

पर्वतीय अभियानों पर विशेष ध्यान

पर्वतीय अभियानों पर विशेष ध्यान
पर्वतीय अभियानों पर विशेष ध्यान

अभ्यास के दौरान दोनों सेनाएं पर्वतीय और अर्धपर्वतीय क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध समूहों के संचालन से जुड़ी रणनीतियों पर काम करेंगी। पैदल सेना आधारित अभियानों को प्रशिक्षण का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। कठिन भूभाग, सीमित गतिशीलता और चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों में सैनिकों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए विभिन्न संयुक्त गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में दोनों सेनाओं की संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना है।

रणनीति और ऑपरेशनल अनुभव होगा साझा

संयुक्त अभ्यास के दौरान भारत और अमेरिका की सेनाएं अपनी रणनीति, तकनीकी प्रक्रियाओं और संचालन संबंधी अनुभवों को साझा करेंगी। संयुक्त योजना तैयार करने और उसे जमीन पर लागू करने के जरिए दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा। विभिन्न इलाकों और बदलती परिस्थितियों में संयुक्त अभियानों के संचालन पर भी विशेष ध्यान रहेगा।

ड्रोन और स्वायत्त तकनीक भी अभ्यास का हिस्सा

इस बार सैन्य अभ्यास में आधुनिक तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। निगरानी और टोही अभियानों के लिए ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों, ड्रोन आधारित क्षमताओं और बहु-क्षेत्रीय युद्ध में हो रहे बदलावों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।

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