Kishau Dam Project : किशाऊ डैम पर अमित शाह ने सुलझाया पेंच, 15 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट से 6 राज्यों को फायदा!

आठ साल से लटका 15 हजार करोड़ रुपये का किशाऊ बांध प्रोजेक्ट आखिरकार अमित शाह की मध्यस्थता से पटरी पर आ गया है। छह राज्यों के बीच फंसे इस बड़े पेंच के सुलझने से अब उत्तर भारत की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। जानिए कैसे यह मेगा प्रोजेक्ट छह राज्यों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा और किसे मिलेगा इसका सबसे बड़ा फायदा।

Kishau Dam Project

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 15, 2026

Kishau Dam Project : लंबे समय से अटके किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट को अब आगे बढ़ने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सहमति जताई। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर राज्यों के बीच लंबे समय से कई मुद्दे लंबित थे।

छह राज्यों ने मिलकर सुलझाए पुराने मतभेद

इस बैठक में अधिकांश राज्यों के मुख्यमंत्री स्वयं शामिल हुए। उनके अलावा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। केंद्र की ओर से केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सहित गृह मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। इससे पहले 16 जून को भी इसी मुद्दे पर बैठक हुई थी, जिसमें छह राज्यों ने परियोजना को लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन यानी MoU की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति दी थी।

टोंस नदी पर बनेगा बहुउद्देशीय बांध

किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट उत्तराखंड में टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। परियोजना के तहत एक बड़े जलाशय का निर्माण किया जाना है, जिसमें पानी को नियंत्रित तरीके से संग्रहित किया जाएगा। इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन जैसे कई उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

यमुना के पुनर्जीवन में भी अहम भूमिका

किशाऊ परियोजना को केवल बिजली और पानी की जरूरत पूरी करने वाली योजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका एक बड़ा उद्देश्य यमुना नदी के प्रवाह को बेहतर बनाना भी है। जलाशय से पानी को नियंत्रित तरीके से छोड़ने पर यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है। इससे नदी के पुनर्जीवन से जुड़े प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है।

पानी और बिजली के बंटवारे पर बनी सहमति

परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में पानी के हिस्से और बिजली उत्पादन से जुड़ी लागत का बंटवारा शामिल था। अब राज्यों के बीच इन विषयों पर सहमति बनने की बात सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के आवंटित पानी के हिस्से से जुड़े मुद्दे को सुलझाने के लिए भी एक व्यवस्था पर सहमति बनी है। हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा।

हिमाचल की बिजली लागत उठाएंगे दिल्ली और राजस्थान

सहमति के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के पानी के हिस्से का उपयोग दिल्ली और राजस्थान करेंगे। इसके बदले परियोजना के बिजली उत्पादन वाले हिस्से में हिमाचल प्रदेश की लागत को दिल्ली और राजस्थान आपस में साझा करेंगे। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे प्रमुख विवाद को दूर करने में मदद करेगी और परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता आसान होगा।

केंद्र उठाएगा जल घटक की 90 प्रतिशत लागत

परियोजना के वित्तपोषण को लेकर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी है। राज्यों के बीच तय व्यवस्था के अनुसार परियोजना के जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। शेष 10 प्रतिशत लागत छह संबंधित राज्यों के बीच साझा की जाएगी। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ कम होने और परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

हरियाणा से राजस्थान तक मिलेगा अतिरिक्त पानी

करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से कई राज्यों और दिल्ली को अतिरिक्त जल उपलब्ध होने की उम्मीद है। प्रस्तावित जल आवंटन के अनुसार हरियाणा को करीब 836 क्यूसेक, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलने की उम्मीद है। इससे सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

अब केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब परियोजना के अगले चरण की तैयारी शुरू होने की उम्मीद है। किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लंबे समय से अटकी इस योजना के लिए राज्यों की सहमति को बड़ा कदम माना जा रहा है।

पानी, बिजली और यमुना के लिए बड़ा प्रोजेक्ट

किशाऊ डैम परियोजना आने वाले समय में उत्तर भारत की जल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ पनबिजली उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सबसे अहम बात यह है कि परियोजना से यमुना के प्रवाह को बेहतर करने की कोशिशों को भी बल मिल सकता है। राज्यों के बीच बनी नई सहमति ने इस बहुउद्देशीय परियोजना को वर्षों बाद फिर से गति दे दी है।

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