Pakistan Exposed: आदित्य धर, जिन्होंने ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ से देश में जोश का संचार किया था, अब अपनी फिल्म ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी के जरिए एक बेहद गंभीर और रणनीतिक विजन लेकर आए हैं। रणवीर सिंह की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म केवल एक एक्शन ड्रामा नहीं है, बल्कि निर्देशक की कल्पनाशीलता और दूरगामी सोच का परिणाम है। फिल्म की पटकथा, संवाद और स्क्रीनप्ले सीधे तौर पर आदित्य धर के उस विजन को दर्शाते हैं, जिसे उन्होंने पार्ट 1 में शुरू कर पार्ट 2 में पूरी तरह स्थापित कर दिया है।
धुरंधर भाग 1 का सस्पेंस
बताते चले कि, ‘धुरंधर’ के पहले हिस्से ने दर्शकों के मन में कई सवाल छोड़े थे। विशेष रूप से बलोच समुदाय के प्रति फिल्म के नजरिए ने लोगों को भ्रमित किया था। आम धारणा यह है कि भारत बलोच आंदोलन का समर्थन करता है, लेकिन फिल्म में उन्हें निशाने पर लेते देख दर्शक चौंक गए थे। यह ‘कन्फ्यूजन’ ही फिल्म की सबसे बड़ी खूबी बनी। अब ‘धुरंधर पार्ट 2’ में इसी राज से पर्दा उठाया गया है, जो पहले पार्ट की कड़ियों को जोड़ते हुए कहानी को एक तार्किक अंजाम की ओर ले जाता है।
सिनेमाई प्रोपेगैंडा से परे एक वास्तविक रणनीतिक रूपरेखा
आज के दौर में जहां कई फिल्मों को प्रोपेगैंडा का टैग दे दिया जाता है, वहीं ‘धुरंधर’ का पहला भाग अपनी वास्तविकता के कारण समीक्षकों की कसौटी पर खरा उतरा था। आदित्य धर ने पहले ही भाग में अपने ‘ब्लू प्रिंट’ की नींव रख दी थी, जिसे पार्ट 2 में विस्तार से समझाया गया है। यह फिल्म महज मनोरंजन नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश है। फिल्म के माध्यम से निर्देशक ने दिखाया है कि कैसे एक सोची-समझी रणनीति के तहत दुश्मन के गढ़ में सेंध लगाई जा सकती है।
फिल्म में रणवीर सिंह का किरदार
आपको बता दे कि, रणवीर सिंह ने फिल्म में जसकीरत सिंह रांगी उर्फ हमजा अली मजारी का किरदार निभाकर ‘ऑपरेशन पाकिस्तान’ को जीवंत कर दिया है। फिल्म का दूसरा भाग ‘धुरंधर: द रिवेंज’ पूरी तरह से प्रतिशोध और न्याय पर आधारित है। लोकप्रिय सिनेमाई फॉर्मूले (बदला) का उपयोग करते हुए आदित्य धर ने एक ऐसी लकीर खींची है, जो इशारा करती है कि यदि इस पथ का अनुसरण किया जाए, तो असल में ‘ऑपरेशन पाकिस्तान’ संभव है। अजय सान्याल (आर. माधवन) के नेतृत्व में यह मिशन कांधार विमान अपहरण और संसद हमले जैसे जख्मों का हिसाब चुकता करता है।
सीमा पार आतंकवाद और अस्थिरता को जड़ से खत्म करने का मिशन
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे भारतीय खुफिया एजेंसियां केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि दुश्मन देश के भीतर जाकर ड्रग्स रैकेट, नकली नोटों की सप्लाई और हथियारों की तस्करी के जाल को काटती हैं। कश्मीर और पंजाब जैसे राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाली ताकतों को समाप्त करने के लिए ‘धुरंधर’ एक मास्टर प्लान की तरह काम करती है। यह फिल्म दिखाती है कि नए भारत का मिजाज अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और सुधारात्मक है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाक बेनकाब
फिल्म के संवाद जैसे “पाकिस्तान का मुस्तकबिल अब हिंदुस्तान तय करेगा” और “नया भारत घर में घुसकर मारता है”, वर्तमान समय की बदलती भू-राजनीति को दर्शाते हैं। फिल्म का अंत ‘बलिदान परमोधर्म:’ के संदेश के साथ होता है, जहाँ रॉ (RAW) के ट्रेनिंग कैंप में सैकड़ों ‘जसकीरत’ तैयार किए जा रहे हैं। यह अंत केवल एक फिल्म का समापन नहीं है, बल्कि एक विचार है कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से अभेद्य योद्धाओं की फौज तैयार करना ही सर्वोच्च धर्म है।









