1998 की खुफिया रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
सार्वजनिक की गई फाइलों में 28 अगस्त 1998 को तैयार की गई एक महत्वपूर्ण प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ भी शामिल है। यह रिपोर्ट तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के लिए तैयार की गई थी। इसका शीर्षक ‘बिन लादेन टेरर नेटवर्क स्टिल अ थ्रेट’ था। रिपोर्ट में अमेरिकी प्रशासन को चेतावनी दी गई थी कि ओसामा बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क लगातार सक्रिय था और उसकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ती जा रही थी।

60 से अधिक देशों तक फैला था नेटवर्क
CIA के आकलन के मुताबिक, उस समय तक अलकायदा से जुड़े सहयोगियों और समर्थकों का नेटवर्क कम से कम 60 देशों में मौजूद था। खुफिया रिपोर्ट में बताया गया था कि संगठन अलग-अलग देशों में अपनी गतिविधियों और संभावित हमलों की क्षमता विकसित कर रहा था। भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब, यमन, कुवैत, युगांडा और नाइजीरिया जैसे देशों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था। हालांकि, दस्तावेज भारत में किसी खास शहर, स्थान या संभावित हमले की निश्चित तारीख की जानकारी नहीं देता।
दूतावास धमाकों के बाद बढ़ी अमेरिकी चिंता
यह रिपोर्ट अगस्त 1998 में केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर हुए घातक बम धमाकों के कुछ ही समय बाद तैयार हुई थी। इन हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इन घटनाओं ने अमेरिका को अलकायदा के बढ़ते वैश्विक खतरे के प्रति गंभीर रूप से सतर्क कर दिया था।

अफगानिस्तान में अलकायदा ठिकानों पर कार्रवाई
अमेरिकी दूतावासों पर हमलों के बाद अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन और उसके संगठन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में अलकायदा से जुड़े ठिकानों और प्रशिक्षण शिविरों को मिसाइल हमलों से निशाना बनाया। इसके बावजूद संगठन की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं और आने वाले वर्षों में उसका नेटवर्क और अधिक खतरनाक रूप में सामने आया।
9/11 से पहले की रणनीति पर नई जानकारी
1998 की यह खुफिया रिपोर्ट इस बात पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है कि 9/11 हमलों से काफी पहले अलकायदा की सोच और गतिविधियां केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थीं। संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने संपर्क और सहयोगी तैयार कर रहा था। भारत का रिपोर्ट में उल्लेख इस व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है, हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों से भारत में किसी विशेष हमले की विस्तृत योजना की पुष्टि नहीं होती।

सार्वजनिक दस्तावेजों से सामने आ रहा पुराना खतरा
CIA द्वारा इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को सार्वजनिक किए जाने से उस दौर की अमेरिकी खुफिया चिंताओं और अलकायदा के वैश्विक विस्तार को समझने में मदद मिलती है। फाइलें यह भी दिखाती हैं कि 9/11 से पहले ही अमेरिकी एजेंसियां ओसामा बिन लादेन के नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मान रही थीं। भारत का उल्लेख इसी व्यापक वैश्विक खतरे के संदर्भ में किया गया था।
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