iPhone 18 Pro: Apple ने अपनी नई iPhone 18 Pro सीरीज को बाजार में उतार दिया है। कंपनी ने इसके साथ iPhone 18 Pro Max और अपना पहला फोल्डेबल फोन iPhone Duo भी पेश किया है। भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये बताई गई है। इतनी ऊंची कीमत को देखते हुए यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर इस प्रीमियम फोन को तैयार करने में Apple की अनुमानित लागत कितनी आती है।
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BOM लागत में हुआ बड़ा इजाफा
रिसर्च फर्म TrendForce के अनुमान के मुताबिक, 256GB स्टोरेज वाले iPhone 18 Pro की Bill of Materials यानी BOM लागत पिछले मॉडल की तुलना में करीब 38 फीसदी बढ़ी है। BOM से आशय फोन में इस्तेमाल होने वाले हार्डवेयर और अलग-अलग कंपोनेंट्स की अनुमानित लागत से है। उपलब्ध इंडस्ट्री अनुमानों के अनुसार, 256GB मॉडल की BOM लागत करीब 726 डॉलर यानी लगभग 64 हजार रुपये हो सकती है। हालांकि, यह आंकड़ा Apple की ओर से आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है। इसे बाजार में उपलब्ध इंडस्ट्री डेटा के आधार पर लगाया गया अनुमान माना जाना चाहिए।
मेमोरी और स्टोरेज बनी सबसे बड़ी वजह
iPhone 18 Pro की बढ़ी हुई निर्माण लागत में सबसे बड़ा योगदान मेमोरी और स्टोरेज कंपोनेंट्स का बताया जा रहा है। TrendForce के अनुसार, 256GB मॉडल की कुल लागत में मेमोरी की हिस्सेदारी पहले लगभग 10 फीसदी थी, जो 2026 की तीसरी तिमाही में बढ़कर करीब 34 फीसदी तक पहुंच गई है। आने वाले समय में यह हिस्सा 40 फीसदी से भी अधिक होने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण दुनियाभर में AI डेटा सेंटर के लिए मेमोरी की बढ़ती मांग है। AI इंडस्ट्री के विस्तार के कारण DRAM और NAND चिप्स की मांग बढ़ी है, जिसका असर उनकी कीमतों पर भी पड़ा है।
A20 Pro चिप ने भी बढ़ाया खर्च
नए iPhone 18 Pro में कंपनी ने A20 Pro प्रोसेसर का इस्तेमाल किया है। यह चिप 2nm निर्माण प्रक्रिया पर आधारित है। नई तकनीक से बेहतर प्रदर्शन और अधिक पावर एफिशिएंसी मिलने की उम्मीद है, लेकिन नई मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया के शुरुआती चरण में उत्पादन लागत अधिक हो सकती है। Counterpoint के अनुमानों के मुताबिक, मेमोरी कंपोनेंट्स के बाद नया चिप प्रोसेस भी फोन की बढ़ी हुई लागत के प्रमुख कारणों में शामिल है।
64 हजार की लागत और 1.64 लाख की कीमत में अंतर क्यों?

अगर 256GB iPhone 18 Pro की अनुमानित BOM लागत करीब 64 हजार रुपये है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी पूरी रकम Apple का मुनाफा है। फोन की अंतिम कीमत तक पहुंचने से पहले कंपनी को कई अन्य खर्च भी उठाने पड़ते हैं। इनमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, पेटेंट, कर्मचारियों की लागत, असेंबली, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग, टैक्स, डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल मार्जिन जैसे खर्च शामिल होते हैं। इसलिए BOM लागत को फोन की पूरी निर्माण लागत या कंपनी के सीधे मुनाफे के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
महंगे फोन के पीछे सिर्फ Apple की कीमत नीति नहीं

iPhone 18 Pro की लागत में इस बार बढ़ोतरी केवल Apple की प्राइसिंग रणनीति का परिणाम नहीं मानी जा रही है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर बाजार में बदलाव और AI इंडस्ट्री की बढ़ती मांग ने मेमोरी चिप्स को महंगा किया है। यही वजह है कि प्रीमियम स्मार्टफोन की लागत पर वैश्विक चिप सप्लाई और AI से जुड़ी मांग का असर दिखाई दे रहा है। आने वाले महीनों में अगर मेमोरी की कीमतों पर दबाव बना रहता है, तो इसका असर नए स्मार्टफोन की कीमतों और कंपनियों की लागत संरचना पर भी पड़ सकता है।
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