Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल पर मीसा भारती का बयान, ‘हमने कभी विरोध नहीं किया’

संसद के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (संशोधन विधेयक) पेश होने के बाद राजद (RJD) सांसद मीसा भारती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने कभी भी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया है, लेकिन उनकी मुख्य मांग 'कोटा के भीतर कोटा' की है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 16, 2026

Women Reservation Bill: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पेश होने के साथ ही देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। गुरुवार (16 अप्रैल) से शुरू हुए इस तीन दिवसीय सत्र में जहाँ सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता और लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती ने विधेयक के प्रावधानों और सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है।

Bihar CM Samrat Choudhary Oath: सम्राट चौधरी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, NDA सरकार का नया अध्याय शुरू

‘बिना लागू किए संशोधन क्यों?’ – मीसा भारती के गंभीर सवाल

मीसा भारती ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो बिल पहले ही लागू हो जाना चाहिए था, सरकार उसे लागू करने के बजाय अचानक संशोधन लेकर आ गई है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि बिल के क्रियान्वयन में हो रही देरी को संशोधन के पीछे छिपाया जा रहा है।

उन्होंने ‘इंडिया ब्लॉक’ (I.N.D.I.A. Block) की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष के सभी दलों ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की है। विपक्ष का मानना है कि सरकार यदि इस तरह के संशोधन के जरिए मूल भावना से खिलवाड़ करती है, तो सदन में इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

विरोध आरक्षण का नहीं, ‘कोटा के भीतर कोटा’ का है

आरजेडी पर अक्सर महिला आरक्षण का विरोध करने के आरोप लगते रहे हैं, जिस पर सफाई देते हुए मीसा भारती ने स्पष्ट किया— “हमने कभी भी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया।” उन्होंने पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारी मांग शुरू से ही समावेशी आरक्षण की रही है। आरजेडी चाहती है कि महिला आरक्षण के भीतर SC (अनुसूचित जाति), ST (अनुसूचित जनजाति) और OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) की महिलाओं के लिए अलग से सीटें आरक्षित की जाएं।

जब तक वंचित समाज की महिलाओं को इसमें जगह नहीं मिलेगी, तब तक आरक्षण का वास्तविक लाभ आखिरी पायदान पर खड़ी महिला तक नहीं पहुंचेगा।

जनगणना और परिसीमन का पेच

विधेयक में परिसीमन (Delimitation) और नई जनगणना की शर्त को लेकर भी मीसा भारती ने केंद्र सरकार को घेरा। सरकार का तर्क है कि यदि 2011 की जनगणना के बजाय नई जनगणना की प्रतीक्षा की गई, तो इसे 2029 तक लागू करना कठिन होगा।

इस पर पलटवार करते हुए मीसा भारती ने कहा कि जब यह बिल पहली बार चर्चा में आया था, तब स्पष्ट रूप से जातिगत जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन की बात कही गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना जातिगत आंकड़े स्पष्ट किए परिसीमन करना चाहती है, जो पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय है। विपक्ष का मुख्य विरोध इसी ‘चक्रव्यूह’ पर है जिसमें आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की जटिलताओं में उलझा दिया गया है।

महिला आरक्षण विधेयक का मुख्य उद्देश्य

विवादों के बीच, इस बिल का प्राथमिक लक्ष्य लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है। सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने से चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। नीति निर्धारण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका होगी। देश के लोकतांत्रिक ढांचे में लैंगिक समानता सुनिश्चित होगी।

Bihar Politics: बिहार में नई सरकार की तैयारी, शपथ से पहले संभावित मंत्रियों की सूची आई सामने