West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति और खेल जगत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। कोलकाता के विश्व प्रसिद्ध विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (साल्ट लेक स्टेडियम) के मुख्य गेट के बाहर सालों से लगी एक बेहद चर्चित और विवादित फुटबॉल मूर्ति (Sculpture) को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। इस मूर्ति में मानव धड़ के बिना केवल दो पैर और उनके ऊपर एक फुटबॉल को टिके हुए दिखाया गया था।
यह मूर्ति कोलकाता की सड़कों पर फुटबॉल के प्रति दीवानगी का प्रतीक मानी जाती थी, जिसे खुद राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष रूप से डिज़ाइन किया था। पश्चिम बंगाल में हुए हालिया राजनीतिक उलटफेर और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने इस पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। इस मूर्ति को लेकर बंगाल की जनता और फुटबॉल प्रेमियों के बीच राय हमेशा बंटी रही थी।
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अजीबोगरीब डिज़ाइन को लेकर शुरू से ही विवादों में थी मूर्ति
साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी इस कलाकृति का विवादों से पुराना नाता रहा है।
अनावरण और इतिहास: इस मूर्ति को साल 2017 में भारत में आयोजित हुए ‘FIFA अंडर-17 वर्ल्ड कप’ से ठीक पहले स्टेडियम के सौंदर्यीकरण अभियान के तहत लगाया गया था। इस मूर्ति के बीचों-बीच तत्कालीन टीएमसी सरकार के ब्रांड ‘बिस्वा बांग्ला’ (Biswa Bangla) का लोगो भी प्रमुखता से उकेरा गया था।
डिज़ाइन पर उठे थे सवाल: जब से इस मूर्ति का उद्घाटन हुआ था, तभी से कोलकाता के खेल प्रेमियों और कला समीक्षकों ने इसके अजीबोगरीब और अधूरे डिज़ाइन पर तीखे सवाल उठाए थे। कई लोग इसे बेहद अनूठा और कलात्मक बताते थे, जबकि एक बड़ा धड़ा इसे बेहद भद्दा और फुटबॉल का मज़ाक उड़ाने वाली कलाकृति करार देता था।
गौरतलब है कि यह वही ऐतिहासिक साल्ट लेक स्टेडियम है जहाँ अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी मैच खेल चुके हैं और जहाँ मोहन बागान व ईस्ट बंगाल जैसी पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी टीमों के बीच कई ऐतिहासिक डर्बी मुकाबले आयोजित होते आए हैं।
सीएम शुभेंदु अधिकारी और निशीथ प्रमाणिक ने निभाया अपना चुनावी वादा
इस मूर्ति को हटाए जाने के पीछे एक सोची-समझी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति है। पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद ही सार्वजनिक मंच से यह घोषणा की थी कि साल्ट लेक स्टेडियम के सामने लगी इस विवादित मूर्ति को हटाया जाएगा।
हाल ही में राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी इस मूर्ति को हटाने से जुड़ा एक कड़ा आधिकारिक बयान जारी किया था, जिसके ठीक बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इस ढांचे को ज़मींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के तुरंत बाद बीजेपी नेता केया घोष ने सोशल मीडिया पर मूर्ति के मलबे की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “क्या आपको साल्ट लेक स्टेडियम के सामने बनी वह भद्दी मूर्ति याद है? अब वादे के मुताबिक उसे हमेशा के लिए हटा दिया गया है।”
आसनसोल में भी चला बुलडोजर
ममता बनर्जी की डिज़ाइन की गई मूर्ति को हटाने के साथ ही पूरे राज्य में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ भी व्यापक अभियान छेड़ दिया गया है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर आसनसोल में एक और बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है।
वहाँ SAIL-ISP (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड – इस्को स्टील प्लांट) प्रबंधन ने बर्नपुर रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत वार्ड संख्या 78 से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर पार्षद अशोक रुद्र के मुख्य राजनीतिक कार्यालय समेत कई अन्य पार्टी दफ्तरों और अवैध रूप से बने क्लब भवनों को पूरी तरह से ढहा दिया गया है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद हो रही इन ताबड़तोड़ कार्रवाइयों ने बंगाल की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है।
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