West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले ने देश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। अभिषेक बनर्जी उन टीएमसी कार्यकर्ताओं के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, जिनकी हालिया हिंसा में मौत हो गई थी। इस दौरान वहां मौजूद भीड़ ने उन पर अंडे और पत्थर फेंके। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि उन्हें हेलमेट पहनाकर सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। इस घटना ने एक तरफ जहां बंगाल में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों को एकजुट होने का एक नया मंच भी प्रदान किया है।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
हमले के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने इस घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया। वहीं, दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे तृणमूल की आंतरिक राजनीति या राज्य में बिगड़ती प्रशासनिक स्थिति का परिणाम बताया है।
इंडिया ब्लॉक की एकजुटता और राहुल गांधी का हस्तक्षेप
हालिया विधानसभा चुनावों में बंगाल में मिली हार के बाद, ‘इंडिया’ गठबंधन में ममता बनर्जी की भूमिका और कद को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। टीएमसी द्वारा बार-बार यह साबित करने की कोशिश की गई कि बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी दलों का कोई वजूद नहीं है। हालांकि, अभिषेक बनर्जी पर हुए इस हमले ने पूरे विपक्षी खेमे को फिर से एक साथ खड़ा कर दिया है।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने न केवल इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की, बल्कि ममता बनर्जी को फोन करके हालचाल भी जाना। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद कभी भी हिंसा का आधार नहीं होने चाहिए। खबर यह भी है कि ममता बनर्जी ने बताया कि राहुल गांधी ने अभिषेक के बेहतर इलाज के लिए उन्हें कांग्रेस शासित राज्यों या अन्य विकल्पों पर विचार करने का सुझाव दिया है।
दिग्गजों ने दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इसे भाजपा की ‘प्रतिशोध की राजनीति’ करार दिया और सुरक्षा व्यवस्था में खामियों पर सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा नफरत और हिंसा की राजनीति के अलावा कुछ नहीं जानती। वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस घटना को राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था का प्रतीक बताते हुए कहा कि भाजपा किसी भी मजबूत विपक्ष को सहन करने में असमर्थ है।
क्या बदलेगा समीकरण?
इस हमले के बाद जो विपक्षी एकजुटता दिखी है, क्या वह भविष्य में किसी बड़े गठबंधन का आधार बनेगी? बंगाल की राजनीति में ‘दीदी’ के लिए यह घटना एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। जहां एक ओर विपक्ष ने एकजुट होकर भाजपा को घेरने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर यह घटना बंगाल के चुनाव के बाद की कड़वाहट को भी दर्शाती है। अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में बंगाल और दिल्ली के बीच सियासी टकराव और तेज होने वाला है। विपक्ष की यह एकजुटता भाजपा के खिलाफ आने वाले समय में कितनी प्रभावी होती है, यह देखना दिलचस्प होगा।










