West Bengal Political: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के भीतर सियासी घमासान और अंतर्कलह तेज हो गई है। राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संसदीय जिले के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी और भरोसेमंद मानी जाने वाली काकोली घोष का यह कदम तृणमूल कांग्रेस के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इस इस्तीफे से ठीक पहले केंद्र सरकार ने डॉ. काकोली घोष की सुरक्षा बढ़ाते हुए उन्हें ‘Y’ कैटेगरी की सुरक्षा मुहैया कराई थी, जिसके बाद से ही उनके अगले सियासी कदम को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई थी।
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पद छिनने से नाराज थीं काकोली
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार पिछले कुछ समय से टीएमसी नेतृत्व के फैसलों से गंभीर रूप से नाराज चल रही थीं। हाल ही में पार्टी ने उन्हें लोकसभा में ‘चीफ व्हिप’ (मुख्य सचेतक) के पद से हटा दिया था और उनकी जगह कल्याण बनर्जी को दोबारा यह अहम जिम्मेदारी सौंप दी थी। इस सांगठनिक फेरबदल के बाद से ही उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ने लगी थीं। इसी बीच, केंद्र सरकार द्वारा उन्हें विशेष सुरक्षा कवच देना और अब उनका इस्तीफा देना, राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।
इस्तीफे में उठाए गंभीर सवाल
डॉ. काकोली घोष ने पार्टी नेतृत्व को भेजे अपने आधिकारिक त्यागपत्र में पश्चिम बंगाल की वर्तमान कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संस्कृति पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में लिखा “हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल के भीतर अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, जिसने आम जनता के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया है। ऐसी स्थिति में लोकतंत्र को जीवित और मजबूत रखने के लिए राजनीति में साफ-सफाई, नैतिक जिम्मेदारी, जवाबदेही, शालीनता और जनता के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता का होना अनिवार्य है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि समाज में खोया हुआ भरोसा और एक स्वस्थ राजनीतिक माहौल केवल आदर्शवाद और पारदर्शी राजनीति के जरिए ही वापस लाया जा सकता है।”
चुनाव में हार की ली नैतिक जिम्मेदारी
सांसद काकोली घोष ने अपने इस्तीफे के लिए हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के निराशाजनक नतीजों को भी मुख्य वजह बताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और एक अनुशासित जनसेवक होने के नाते वे इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए बारासात के जिलाध्यक्ष पद को छोड़ रही हैं।
इसके साथ ही उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को सीधे तौर पर नसीहत देते हुए लिखा कि यदि वे अब भी पार्टी की छवि को सुधारना और चमकाना चाहती हैं, तो उन्हें चाटुकारों को छोड़कर पहले की तरह ईमानदार, वफादार और पुराने जमीनी कार्यकर्ताओं पर भरोसा करना होगा और उनके साथ मिलकर काम करना होगा। काकोली का यह तीखा पत्र अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।
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