West Bengal Election : 91 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, दिलीप घोष बोले- असली मतदाताओं के भी कटे नाम

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की स्पेशल रिवीजन के बाद 91 लाख नाम हटाए जाने से हड़कंप मच गया है। टीएमसी इसे साजिश बता रही है, वहीं बीजेपी के दिग्गज नेता दिलीप घोष ने कुछ 'असली वोटर्स' के नाम कटने की बात मानकर नया विवाद छेड़ दिया है। जानिए इस धमाके के पीछे की पूरी कहानी!

West Bengal Election

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 10, 2026

West Bengal Election :  पश्चिम बंगाल की राजनीतिक फिजाओं में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। राज्य के “स्पेशल इंक्वायरी रजिस्टर” (SIR) को लेकर मचे घमासान के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। यह आंकड़ा बेहद संवेदनशील है क्योंकि इनमें से लगभग 63 प्रतिशत यानी करीब 57 लाख लोग हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इस बड़े बदलाव ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। जहाँ एक तरफ वोटर्स के भविष्य पर सवालिया निशान लगा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों और सत्ताधारी खेमे के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। इस तनावपूर्ण माहौल में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता दिलीप घोष के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।

खड़गपुर में दिलीप घोष की विवादित टिप्पणी: छूटे हुए मतदाताओं को बताया देशद्रोही

खड़गपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष अक्सर अपनी बेबाक और कई बार बेहद तीखी बयानबाजी के लिए चर्चा में रहते हैं। गुरुवार की रात जब वे खड़गपुर के तलिबागिचा इलाके में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने पहुंचे, तो उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया जिससे विवाद का एक नया बवंडर खड़ा हो गया। दिलीप घोष ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को जायज ठहराते हुए उन वोटरों को सीधे तौर पर ‘देशद्रोही’ और ‘गद्दार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि “जो लोग अब जाने के लिए तैयार हैं, उनके लिए विदाई की आखिरी घंटी बज चुकी है।” घोष का निशाना स्पष्ट तौर पर उन लोगों की तरफ था जिनके नाम हटाए गए हैं, जिससे सियासी गलियारों में खलबली मच गई है।

चुनाव आयोग की कार्रवाई और नकली वोटरोंपर दिलीप घोष का प्रहार

अपनी सभा के दौरान दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पूर्ववर्ती वामपंथी सरकार (CPM) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने सख्ती बरतते हुए ‘गंदा पानी’ निचोड़ दिया है और अब तक 90 लाख से ज्यादा नाम हटाए जा चुके हैं। घोष का मानना है कि आने वाले समय में 10 से 15 लाख और नाम हटाए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी इन “नकली वोटरों” के सहारे ही बार-बार सत्ता पर काबिज होती रही है। दिलीप घोष के अनुसार, पूरे देश में इन गद्दारों को सत्ता से बेदखल करने की लहर चल रही है और इस बार बंगाल की जनता भी उसी रास्ते पर चलेगी। उनके इस कड़े लहजे ने न केवल मतदाताओं को हैरान किया बल्कि चुनाव के एन वक्त पर भाजपा की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए।

तृणमूल कांग्रेस का पलटवार: प्रदीप सरकार ने घेरा भाजपा का दोहरा चरित्र

दिलीप घोष के इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपना लिया है। खड़गपुर से टीएमसी उम्मीदवार प्रदीप सरकार ने भाजपा पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि दिलीप घोष की बातों से उनका असली चेहरा सामने आ गया है। प्रदीप सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुराने वादों की याद दिलाते हुए कहा, “एक तरफ शाह कहते थे कि किसी हिंदू का नाम नहीं कटेगा, वहीं दूसरी तरफ जो 91 लाख नाम हटाए गए हैं, उनमें से 57 लाख हिंदू हैं। तो क्या अब दिलीप घोष इन लाखों हिंदुओं को देशद्रोही मान रहे हैं?” टीएमसी ने इसे न केवल आम जनता का अपमान बताया बल्कि इसे देश की न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य भी करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे इस मामले में कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।

विवादों के खिलाड़ी दिलीप घोष: भाजपा नेतृत्व की बढ़ी चिंता

बंगाल की राजनीति में दिलीप घोष को एक ऐसे योद्धा के रूप में देखा जाता है जो जमीन पर इंच-इंच की लड़ाई लड़ना जानते हैं। उनके बारे में कहावत मशहूर है कि वे जब सुबह सैर पर निकलते हैं, तो उनके साथ भाजपा के दो नए कार्यकर्ता जुड़ जाते हैं। लेकिन उनकी यही “मुँहफट” छवि कभी-कभी पार्टी के लिए गले की हड्डी बन जाती है। मतदान से ठीक पहले मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को ‘देशद्रोही’ कहने से भाजपा के भीतर भी बेचैनी साफ़ देखी जा रही है। हालांकि, अभी तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिंदू वोटर्स के नाम कटने पर ऐसा बयान देना भाजपा के लिए चुनावी मैदान में आत्मघाती साबित हो सकता है।

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