West Bengal Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पहली भाजपा सरकार के गठन के तीन सप्ताह बाद, आज 1 जून 2026 को राज्य को पूर्ण मंत्रिपरिषद मिलने जा रही है। सुबह 11 बजे लोक भवन में आयोजित होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में 35 नए मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। राज्यपाल आर.एन. रवि नए मंत्रियों को पद की शपथ दिलाएंगे।
इस विस्तार के बाद, मंत्रिपरिषद की कुल संख्या मुख्यमंत्री सहित 41 हो जाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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मंत्रिमंडल में किन बड़े चेहरों को मिल सकती है जगह?
सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में अनुभवी और नए नेताओं का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। संभावित मंत्रियों की सूची में कई चर्चित नाम शामिल हैं:
अर्जुन सिंह: पूर्व तृणमूल नेता और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा।
अशोक डिंडा: क्रिकेटर से नेता बने विधायक।
स्वपन दासगुप्ता: पूर्व राज्यसभा सांसद।
रूपा गांगुली: वरिष्ठ भाजपा नेत्री और प्रसिद्ध अभिनेत्री।
तपास रॉय: पूर्व टीएमसी मंत्री, जो भाजपा में शामिल हुए।
अनुभवी विधायकों और नए चेहरों का समावेश
विस्तार में उन विधायकों को प्राथमिकता दी गई है जिन्होंने विधानसभा चुनाव में अपनी सीट बरकरार रखी है। इनमें अजय कुमार पोद्दार, दीपक बर्मन, शंकर घोष और तीन बार के विधायक जोयल मुर्मू जैसे वरिष्ठ नाम शामिल हैं। इसके साथ ही, कई पहली बार चुनकर आए युवा विधायकों को भी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिससे प्रशासन में नई ऊर्जा का संचार हो सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक महत्व
गौरतलब है कि 9 मई 2026 को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ केवल पांच अन्य मंत्रियों (अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, दिलीप घोष, अशोक किर्तनिया और क्षुदिराम टुडू) ने शपथ ली थी।
यह मंत्रिमंडल विस्तार भाजपा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 294 में से 207 सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत किया है। मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के लिए रवींद्र जयंती (9 मई) की तिथि का चयन करना, राज्य की सांस्कृतिक पहचान के प्रति भाजपा की गंभीरता को दर्शाता है।
अब देखना यह होगा कि नवनिर्मित मंत्रिपरिषद किस प्रकार राज्य के विकास और आगामी बजट सत्र की चुनौतियों का सामना करती है। इस मंत्रिमंडल में उत्तर और दक्षिण बंगाल के विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की भी पूरी कोशिश की गई है, जो पूर्व की सरकारों में अक्सर उपेक्षित रहा था।
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