Sugar Price: पिछले कुछ महीनों के दौरान देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर आम जनता से लेकर विपक्ष तक लगातार केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। हालांकि, हाल ही में चीनी के दामों में कुछ नरमी और गिरावट देखने को मिली है, जिसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस पूरे मामले पर सरकार का बचाव किया है। उन्होंने एक स्पष्ट बयान देते हुए कहा है कि मौजूदा समय में सरकार किसी भी कृषि उत्पाद के दाम तय नहीं कर सकती है।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग पर प्रतिक्रिया

यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में तब सामने आया जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ लिमिटेड (NFCSF) के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम के दौरान वहां मौजूद विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और शुगर इंडस्ट्री के प्रमुख प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने चीनी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को बढ़ाने की जोरदार मांग रखी। इस मांग का जवाब देते हुए ही गडकरी ने वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति का हवाला दिया।
गडकरी ने स्पष्ट किया कि आज हम एक खुली और वैश्विक अर्थव्यवस्था (ग्लोबल इकॉनमी) का हिस्सा हैं। ऐसी आर्थिक व्यवस्था में कोई भी चुनी हुई सरकार, चाहकर भी कृषि उत्पादों के भाव खुद तय नहीं कर सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि दुनिया में चीनी की कीमतें ब्राजील में तय होती हैं, मक्के के भाव अमेरिका तय करता है, और पाम ऑयल की कीमतें मलेशिया के बाजार से तय होती हैं।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल आज विपक्ष में हैं, वे राजनीति के तहत किसानों के लिए ऐसे ऊंचे दामों की मांग तो आसानी से कर देते हैं, लेकिन जब वे खुद सत्ता में होते हैं तो वे भी व्यावहारिक मजबूरियों के कारण कुछ नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि बयान देना बहुत आसान है, लेकिन जमीन पर उन्हें लागू करना बेहद कठिन होता है।
भारत और ब्राजील की लागत में अंतर और कीमतों का गणित

केंद्रीय मंत्री ने देश में चीनी के दाम कम या ज्यादा होने के मुख्य कारणों पर रोशनी डालते हुए ब्राजील की कृषि व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ब्राजील में खेती के लिए जमीन के एक-एक टुकड़े का आकार लगभग 2,000 से 3,000 एकड़ तक होता है। उनके पास विशाल भूमि है और वे कृषि कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक मशीनों का उपयोग करते हैं। ब्राजील में चीनी के उत्पादन की लागत करीब 23 रुपये प्रति किलोग्राम पड़ती है, जबकि भारत में गन्ने और चीनी के उत्पादन की लागत कम से कम 33 से 34 रुपये प्रति किलोग्राम आती है। जब ब्राजील में चीनी का अत्यधिक उत्पादन होता है और वहां अतिरिक्त स्टॉक बच जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बढ़ने के कारण भारत में भी चीनी की कीमतें अपने आप नीचे गिर जाती हैं।
चीनी उत्पादन के साथ अन्य उत्पादों पर ध्यान देने की सलाह

अपने संबोधन के अंत में मंत्री नितिन गडकरी ने केवल चीनी के उत्पादन पर निर्भर रहने को नाकाफी बताया। उन्होंने कहा कि देश के किसानों और चीनी मिलों के लिए सिर्फ पारंपरिक चीनी बनाकर कमाई करना अब पर्याप्त नहीं है। इस उद्योग को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आय बढ़ाने के लिए गन्ने से निकलने वाले अन्य सह-उत्पादों (बायो-प्रॉडक्ट्स) पर भी विशेष ध्यान देना होगा। इनमें गन्ने के कचरे का सही इस्तेमाल, बायोमास से तैयार होने वाले उत्पाद और जैविक खाद जैसी चीजें शामिल हैं। यदि चीनी उद्योग इन वैकल्पिक क्षेत्रों पर ध्यान दे, तो किसानों और मिलों दोनों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
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