
UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ हाई कोर्ट ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है, तो दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग ने ग्राम प्रधानों के प्रशासक के तौर पर कार्यकाल को छह महीने और बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के एक बयान ने पूरे मामले को और गरमा दिया है। राजभर का कहना है कि जब तक पिछड़ों का आरक्षण तय नहीं हो जाता, तब तक पंचायत चुनाव नहीं होने देंगे। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यूपी पंचायत चुनाव पर क्यों बना हुआ है असमंजस?
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। हाई कोर्ट की तरफ से तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया गया है, लेकिन दूसरी तरफ सरकार के स्तर पर प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाने की कवायद चल रही है। ऐसे में चुनाव की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल, मौजूदा व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है। उनका छह महीने का कार्यकाल 24 नवंबर को पूरा होने वाला है। अब पंचायती राज विभाग ने इसे अगले छह महीने तक बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो प्रधानों को फिलहाल प्रशासक के तौर पर काम करने का एक और मौका मिल सकता है।
पिछड़ों के आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव नहीं: ओमप्रकाश राजभर
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने साफ कर दिया है कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण का मामला सुलझे बिना पंचायत चुनाव कराना आसान नहीं होगा। एक जनसभा में उन्होंने कहा कि जब तक पिछड़ों का आरक्षण सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक वह चुनाव नहीं होने देंगे।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में राजभर भोजपुरी भाषा में विरोध करने वालों को जवाब देते नजर आ रहे हैं। वह कह रहे हैं कि कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के सोशल मीडिया पर बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें पहले अपने नेताओं को संभालना चाहिए। हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
विधानसभा चुनाव के बाद बजेगा पंचायत चुनाव का बिगुल?
ओमप्रकाश राजभर ने वायरल वीडियो में यह भी दावा किया कि विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव का बिगुल बजेगा। उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग हाई कोर्ट में अपनी बात रखेगा। आयोग की तरफ से बताया जा सकता है कि 50 जिलों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 25 जिलों का काम अभी बाकी है।
राजभर के मुताबिक, आयोग अदालत से इसके लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है तो चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि चाहकर भी वह अभी चुनाव नहीं करा पाएंगे।
प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाने का प्रस्ताव CM के पास
इस पूरे विवाद के बीच ओमप्रकाश राजभर ने ग्राम प्रधानों के प्रशासक के तौर पर कार्यकाल को लेकर भी बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाने से जुड़ी फाइल पर उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए हैं और प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेज दिया है।
राजभर ने कहा कि प्रधान लोग छह महीने और प्रशासक रह सकते हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 24 नवंबर तक है और इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधान जी लोग अपने पद का आनंद लें।
‘मेरे पास पावर है और मैं उसका इस्तेमाल कर रहा हूं’
ओमप्रकाश राजभर ने अपने फैसले और बयान पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उनके पास पावर है और वह उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसे जो करना है, वह कर सकता है। वायरल वीडियो में वह विरोध करने वालों पर अमर्यादित टिप्पणियां करते हुए भी सुनाई दे रहे हैं।
हाई कोर्ट के आदेश और सरकार की तैयारी के बीच फंसा पंचायत चुनाव
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग को भी एक महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा था।
अब एक तरफ कोर्ट का आदेश है, दूसरी तरफ पिछड़ों के आरक्षण को लेकर आयोग की प्रक्रिया और सरकार की तैयारियां हैं। वहीं, राजभर के विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव कराने वाले बयान ने सियासी बहस को और तेज कर दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूपी में पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे या फिर प्रधानों का प्रशासक के तौर पर कार्यकाल बढ़ाकर चुनाव को आगे खिसकाया जाएगा।











