West Bengal By Election: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दक्षिण 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल फाल्टा विधानसभा सीट (Falta Assembly Seat) पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड जीत हासिल करते हुए इतिहास रच दिया है। बीजेपी के उम्मीदवार देबांगशु पांडा ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सियासी गढ़ में सेंध लगाते हुए रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज की है।
ताजा और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी के देबांगशु पांडा को इस उपचुनाव में कुल 1,49,666 वोट हासिल हुए हैं। उन्होंने अपने सबसे नजदीकी प्रतिद्वंद्वी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी को 1,09,021 वोटों के विशाल और ऐतिहासिक अंतर से शिकस्त दी है। इस एकतरफा मुकाबले में सत्ताधारी दल टीएमसी (TMC) को करारी हार का सामना करना पड़ा है और वह रेस में काफी पीछे छूट गई।
मतगणना के पहले राउंड से ही एकतरफा रहा मुकाबला
फाल्टा सीट पर हुई मतगणना की शुरुआत से ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत स्थिति और दबदबा बनाए रखा। वोटों की गिनती का जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ता गया, बीजेपी के देबांगशु पांडा की लीड (बढ़त) का ग्राफ आसमान छूने लगा।
एकतरफा रहा चुनावी दंगल
मतों का अंतर इतना बड़ा था कि विपक्षी दलों के काउंटिंग एजेंटों के हौसले शुरुआती राउंड्स में ही पस्त हो गए। राजनीतिक विश्लेषक इस जीत को पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीति में बीजेपी के लिए एक बहुत बड़ी और टर्निंग पॉइंट (मोड़) साबित होने वाली सफलता मान रहे हैं, क्योंकि फाल्टा को पारंपरिक रूप से सत्ताधारी दल का मजबूत इलाका माना जाता रहा है।
विवादों में रहा था चुनाव
फाल्टा विधानसभा सीट का यह उपचुनाव शुरू से ही देश भर की मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ था। इससे पहले 29 अप्रैल को हुई शुरुआती वोटिंग के दौरान इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर चुनावी गड़बड़ियों, बूथ कैप्चरिंग और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की गंभीर शिकायतें सामने आई थीं।
अनोखी गड़बड़ी की शिकायतें
कई मतदान केंद्रों पर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि ईवीएम (EVM) मशीनों के विशेष बटनों पर जानबूझकर फेवीक्विक या सेलोटेप लगा दिया गया था, ताकि जनता एक खास दल को वोट न दे सके। इसके अलावा कुछ संवेदनशील बूथों पर वोटिंग कंपार्टमेंट के भीतर ईवीएम पर तेज गंध वाला इत्र छिड़कने के भी आरोप लगे थे, जिससे मतदाताओं का ध्यान भटकाया जा सके। इन गंभीर मामलों का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) ने संज्ञान लिया था।
चुनाव आयोग की सख्ती
इन तमाम अनियमितताओं की प्राथमिक जांच के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए 29 अप्रैल को हुए मतदान को पूरी तरह रद्द घोषित कर दिया था और पूरी विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान (Re-Polling) कराने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया था।
गुरुवार को कड़े सुरक्षा घेरे और केंद्रीय बलों की निगरानी में फाल्टा के सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोट डाले गए। इस बार पुनर्मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और कहीं से भी किसी भी प्रकार की हिंसा या झड़प की खबर सामने नहीं आई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस शांतिपूर्ण माहौल से उत्साहित होकर फाल्टा की जनता ने रिकॉर्ड 86.11 प्रतिशत मतदान किया, जो सीधे तौर पर सत्ता विरोधी लहर और बदलाव की गवाही दे रहा था।
‘टीएमसी पहले ही छोड़ चुकी थी मैदान’
इस शानदार और ऐतिहासिक चुनावी नतीजे के बाद बीजेपी खेमे में जश्न का माहौल है। नतीजों से ठीक पहले बीजेपी के फायरब्रांड और वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने दावा किया था कि फाल्टा में मुकाबला पूरी तरह एकतरफा रहने वाला है।
दिलीप घोष ने तंज कसते हुए कहा था कि केंद्रीय बलों की मुस्तैदी और स्वतंत्र चुनाव के डर से टीएमसी के गुंडे और नेता पहले ही मैदान छोड़कर भाग चुके हैं। आज आए नतीजों ने उनके इस दावे पर मुहर लगा दी है। इस रिकॉर्डतोड़ जीत के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरणों में एक नया उबाल आना तय माना जा रहा है।










