West Bengal Bakrid controversy: ‘आग से मत खेलो, कुर्बानी तो होगी…’ शुभेंदु अधिकारी को हुमायूं कबीर की खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले खुले में नमाज और पशुओं की कुर्बानी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने भाजपा और शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए साफ किया है

West Bengal Bakrid controversy

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 21, 2026

West Bengal Bakrid controversy: पश्चिम बंगाल में बकरीद के त्योहार से ठीक पहले खुले में नमाज और पशुओं की कुर्बानी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी पर तीखा हमला बोला है। कबीर ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मुस्लिम समुदाय अपनी धार्मिक परंपराओं और विशेष रूप से कुर्बानी के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने राज्य की भाजपा लीडरशिप को चेतावनी देते हुए ‘आग से न खेलने’ की सलाह दी है।

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“कुर्बानी तो होगी, चाहे गाय हो या बकरा”

समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) से बातचीत करते हुए हुमायूं कबीर ने अपने रुख को बेहद आक्रामक अंदाज में सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश में संविधान का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता भी बनी रहनी चाहिए। कबीर ने स्पष्ट किया कि बकरीद पर कुर्बानी की रस्म हर हाल में निभाई जाएगी। उन्होंने कहा, “कुर्बानी तो होगी; चाहे वह गाय की हो, बकरे की हो या फिर ऊंट की हो। जो भी पशु इस्लाम में कुर्बानी के लिए जायज माने गए हैं, उनकी कुर्बानी दी जाएगी।” उन्होंने सीधे तौर पर शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए कहा कि अगर सरकार या भाजपा नेताओं ने इस धार्मिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की अड़चन डालने या रोक लगाने की कोशिश की, तो परिणाम उनके लिए ही बेहद नुकसानदेह साबित होंगे।

बीफ एक्सपोर्ट और स्लॉटर हाउस पर उठाए सवाल

तुष्टीकरण के आरोपों पर पलटवार करते हुए हुमायूं कबीर ने सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि देश में 37 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी गाय का गोश्त (बीफ) खाती है। कबीर ने तंज कसते हुए कहा कि अगर भाजपा को वाकई इससे आपत्ति है, तो सबसे पहले देश के आधिकारिक स्लॉटर हाउस (बूचड़खाने) बंद किए जाने चाहिए, जिन्हें सरकार ने खुद लाइसेंस जारी किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार बीफ का विदेशों में निर्यात (एक्सपोर्ट) करके भारी राजस्व कमा रही है; क्या सरकार इस कमाई और व्यापार को बंद करने का दम रखती है?

सड़कों पर नमाज

ईद और बकरीद के मौके पर सड़कों पर नमाज पढ़े जाने के विवाद पर भी कबीर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय सड़कों पर नमाज पढ़ने का शौकीन नहीं है। अगर सरकार चाहती है कि सड़कों पर ट्रैफिक जाम न हो, तो उसे नमाजियों के लिए बड़े मैदानों की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि सरकार बड़े मैदान मुहैया कराने में नाकाम रहती है, तो मुस्लिम समाज के पास सड़कों पर नमाज पढ़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।

दूसरी तरफ, भाजपा नेताओं का इस पर अलग तर्क है। भाजपा का कहना है कि यह विरोध किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ के विरुद्ध है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और ईरान जैसे इस्लामिक देशों में भी सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने पर पाबंदी है, इसलिए भारत में भी इसे धार्मिक चश्मे से देखने के बजाय नागरिक अनुशासन के तौर पर देखा जाना चाहिए।

पश्चिम बंगाल सरकार का सख्त नोटिस और नए नियम

इस पूरे सियासी घमासान के बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद से पहले एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सूचना (नोटिस) जारी की है। इस नोटिस के अनुसार, राज्य में बिना वैध ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ (स्वास्थ्य प्रमाण पत्र) के गाय, बैल, बछड़े या भैंस जैसे मवेशियों को काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इस नियम को सख्ती से लागू करने के लिए आदेश दिया गया है कि प्रमाण पत्र पर दो अलग-अलग अधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं। सरकार ने साफ किया है कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले को एक गंभीर अपराध माना जाएगा, जिसके तहत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की जेल और एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार के इस कदम के बाद से ही राज्य में इस विषय पर बहस और तेज हो गई है।

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