Weather Update: कहीं झमाझम बारिश तो कहीं सूखा, हरियाणा में बिगड़ा मानसून का संतुलन

हरियाणा में मानसून ने इस बार सबको चौंका दिया है। कुछ जिलों में लगातार झमाझम बारिश हो रही है, जबकि कई इलाके अब भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। आखिर बारिश का यह असमान पैटर्न क्यों बना, अल नीनो कितना जिम्मेदार है और किसानों के लिए आगे क्या खतरा है?

हरियाणा में बिगड़ा मानसून का संतुलन

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 10, 2026

Weather Update: हरियाणा में इस बार मानसून का स्वरूप बदला हुआ नजर आ रहा है। प्रदेश के कई जिलों में जहां लगातार बारिश हो रही है, वहीं कुछ जिलों में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही। अल नीनो के प्रभाव और कम दबाव वाले सिस्टम के कम बनने के कारण प्रदेश में बारिश का वितरण असमान हो गया है। इसी वजह से कुछ इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है, जबकि कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।

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कई जिलों में अच्छी बारिश, कुछ में निराशा

वीरवार को करनाल, भिवानी, चरखी-दादरी, गुरुग्राम, पलवल और यमुनानगर सहित कई जिलों में अच्छी बारिश हुई। लगातार चौथे दिन इन क्षेत्रों में मानसून सक्रिय दिखाई दिया। शाम पांच बजे तक करनाल में 68 मिलीमीटर, चरखी-दादरी में 45 मिलीमीटर, भिवानी में 34 मिलीमीटर, यमुनानगर में 44.5 मिलीमीटर, पलवल में 23.5 मिलीमीटर और कैथल में 18 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

दूसरी ओर हिसार, सिरसा और फतेहाबाद जैसे जिलों में बारिश नहीं हुई। इन क्षेत्रों में छिटपुट बूंदाबांदी के बाद उमस और बढ़ गई, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मानसून के शुरुआती नौ दिनों में इन जिलों में बारिश बेहद कम रही है, जिसके कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।

किसानों की बढ़ी चिंता

बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ सकता है। धान, कपास और अन्य खरीफ फसलों के लिए मानसूनी बारिश काफी अहम होती है। हिसार, सिरसा और फतेहाबाद जैसे कृषि प्रधान जिलों में बारिश नहीं होने से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है और फसलों की बढ़वार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

विशेषज्ञों ने बताई वजह

मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार इस बार मानसून कमजोर स्थिति में है। प्रदेश में एक समान बारिश का पैटर्न देखने को नहीं मिलेगा। अल नीनो के प्रभाव के चलते कुछ क्षेत्रों में बारिश कम हो रही है। इसके अलावा कम दबाव वाले क्षेत्र कम बन रहे हैं, जिससे मानसून टर्फ में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी कारण कहीं भारी बारिश हो रही है तो कहीं बारिश का इंतजार लंबा होता जा रहा है।

पश्चिमी विक्षोभ भी कमजोर

विशेषज्ञों का कहना है कि जेट धाराओं के दक्षिण की ओर न होने से पश्चिमी विक्षोभ भी प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं। आमतौर पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ बारिश में मदद करते हैं, लेकिन इस बार इनका असर सीमित है। फिलहाल जीटी बेल्ट और अरावली क्षेत्र से लगे जिलों में ज्यादा बारिश हो रही है।

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आगे भी बनी रह सकती है असमानता

मौसम के मौजूदा हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में भी प्रदेश में बारिश का वितरण असमान रह सकता है। कुछ जिलों में अच्छी बारिश जारी रह सकती है, जबकि कुछ इलाकों में किसानों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।