Trump Tariff India : रूस प्रतिबंध बिल पास, भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस प्रतिबंध विधेयक पास कर दिया है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत भी संभावित प्रभावित देशों में है। हालांकि भारत पर टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है।

Trump Tariff India

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 17, 2026

Trump Tariff India : अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर 2026 को रूस के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध और टैरिफ से जुड़े विधेयक को 262-159 वोटों से पारित कर दिया। ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ नाम वाले इस विधेयक को अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा गया है। इसके कानून बनने पर प्रशासन को रूस और रूसी ऊर्जा पर निर्भर देशों के खिलाफ अतिरिक्त आर्थिक कदम उठाने की व्यापक शक्तियां मिल सकती हैं।

दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर विधेयक

यह कानून दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की पहल से जुड़ा है और इसे तैयार करने में एक साल से अधिक समय तक बातचीत चली। सीनेट ने अगस्त में इसे पारित कर दिया था। प्रतिनिधि सभा में भी इसे द्विदलीय समर्थन मिला, हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इसके राष्ट्रपति को दी जाने वाली अतिरिक्त टैरिफ शक्तियों को लेकर मतभेद दिखाई दिए।

रूसी अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों पर सख्ती

विधेयक में रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, बैंकों और अर्थव्यवस्था के रणनीतिक क्षेत्रों पर नए प्रतिबंधों का प्रावधान है। इसका उद्देश्य रूस की आय के प्रमुख स्रोतों पर दबाव बढ़ाना बताया गया है। खासतौर पर ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों को निशाना बनाकर मॉस्को की आर्थिक क्षमता को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।

‘शैडो फ्लीट’ के टैंकर भी निशाने पर

विधेयक में रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को भी निशाना बनाया गया है। इन जहाजों पर मौजूदा पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए रूसी तेल निर्यात में मदद करने का आरोप लगाया जाता है। प्रस्तावित कदमों का उद्देश्य ऐसे समुद्री नेटवर्क पर कार्रवाई कर रूस की ऊर्जा आय को प्रभावित करना है।

रूस की ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ

विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इसके तहत शीर्ष पांच खरीदार देशों पर अधिकतम 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार इस प्रावधान का असर भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल खरीदारों पर भी पड़ सकता है।

कुछ देशों को मिल सकती है टैरिफ से छूट

विधेयक में कुछ परिस्थितियों में देशों को राहत देने का प्रावधान भी रखा गया है। ऐसे देश, जो रूस से अपनी प्राकृतिक गैस खरीद सीमित कर रहे हैं और आयात घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं, कुछ प्रतिबंधों से बाहर रह सकते हैं। इससे यूरोपीय देशों के लिए अलग स्थिति बनने की संभावना बताई गई है।

ईरान पर भी बढ़ सकती है अमेरिकी कार्रवाई

यह कानून केवल रूस तक सीमित नहीं है। इसके जरिए ईरान के ऊर्जा और हथियार क्षेत्रों से संबंधित प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाने का प्रावधान शामिल किया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस विधेयक के जरिए रूस और ईरान दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में कदम रखा है।

ट्रंप के हाथ में अब अंतिम फैसला

प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक अब राष्ट्रपति ट्रंप के पास है। हस्ताक्षर होने पर यह कानून बन जाएगा और अमेरिकी प्रशासन को संबंधित देशों पर नए टैरिफ और प्रतिबंध लागू करने की अतिरिक्त वैधानिक शक्ति मिलेगी। हालांकि, इन शक्तियों का वास्तविक इस्तेमाल कब और किन देशों के खिलाफ किया जाएगा, यह आगे प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ता आर्थिक दबाव

यह विधेयक रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी आर्थिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण विधायी कदम के रूप में सामने आया है। इसका मुख्य फोकस रूस की ऊर्जा आय, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। साथ ही, रूसी ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर संभावित 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी असर डाल सकता है।

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