Vivek Tiwari Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज से करीब आठ साल पहले हुई एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की सनसनीखेज हत्या के मामले में आखिरकार अदालत का बड़ा फैसला सामने आ गया है। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड ने उस समय देश की पूरी पुलिस व्यवस्था और कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया था। इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए लखनऊ की जिला जज कोर्ट ने मुख्य आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को दोषी करार दिया है, जबकि सह-आरोपी सिपाही संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में सजा के ऐलान के लिए 23 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।
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क्या थी पूरी वारदात?

यह खौफनाक घटना 29 सितंबर 2018 की देर रात की है। एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से अपने घर लौट रहे थे। जब उनकी कार गोमतीनगर एक्सटेंशन में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास पहुँची, तो वहाँ तैनात सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उन्हें गाड़ी रोकने का इशारा किया। किन्हीं कारणों से विवेक तिवारी ने कार नहीं रोकी। पुलिसकर्मियों की ओर से यह दावा किया गया था कि कार रोकने के बजाय उन्हें टक्कर मारने की कोशिश की गई थी।
इसी गहमागहमी और विवाद के दौरान सिपाही प्रशांत चौधरी ने कार चला रहे विवेक तिवारी पर गोली चला दी। गोली सीधे विवेक को जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतका की सहकर्मी सना खान की शिकायत पर गोमतीनगर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद दोनों आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार कर तुरंत निलंबित कर दिया गया था।
अदालत का फैसला और सजा पर सुनवाई

लखनऊ जिला जज की अदालत में लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद आखिरकार फैसला सुनाया गया। आठ साल लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले में मुख्य आरोपी प्रशांत चौधरी को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया है। अदालत अब 23 सितंबर को सजा के बिंदु पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी। वहीं, सह-आरोपी संदीप कुमार को कोर्ट ने सुबूतों की कमी के चलते राहत देते हुए आरोपमुक्त कर दिया है।
परिजनों ने जताई गहरी निराशा, ऊपरी अदालत में देंगे चुनौती

इस फैसले के सामने आने के बाद विवेक तिवारी के परिवार में निराशा का माहौल है। घटना के बाद से ही न्याय की लड़ाई लड़ रही उनकी पत्नी कल्पना तिवारी ने अदालत के इस निर्णय पर असंतोष जताया है। परिजनों का कहना है कि वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे और सजा तय होने के बाद आगे की कानूनी रणनीति पर विचार करेंगे।
याद दिला दें कि इस हत्याकांड के तूल पकड़ने पर भारी राजनीतिक सरगर्मी भी देखने को मिली थी, जहाँ तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। बाद में सरकार द्वारा की गई संस्तुति के आधार पर कल्पना तिवारी को लखनऊ नगर निगम में नौकरी दी गई थी। अब जबकि अदालत ने मामले में एक आरोपी को गैर इरादतन हत्या का दोषी मान लिया है, सबकी निगाहें 23 सितंबर को आने वाले सजा के फैसले पर टिकी हुई हैं।
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