Vijaya Mehta Death: भारतीय रंगमंच और समानांतर सिनेमा की प्रतिष्ठित हस्ती विजया मेहता का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मराठी थिएटर को नई दिशा देने वाली विजया मेहता ने अपने लंबे करियर में अभिनय, निर्देशन और रंगमंच के क्षेत्र में कई यादगार योगदान दिए। उनके जाने से भारतीय थिएटर और फिल्म जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
बॉबी देओल की आश्रम सीजन 4 की शूटिंग अगस्त से होगी शुरू जल्द।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि
विजया मेहता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर श्रद्धांजलि संदेश साझा करते हुए लिखा कि विजया मेहता को भारतीय संस्कृति और सिनेमा की महान हस्तियों में हमेशा याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने आधुनिक मराठी रंगमंच को नई पहचान दिलाई और अपनी रचनात्मक सोच, दूरदृष्टि तथा उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से कला जगत में एक अलग मुकाम बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि विजया मेहता का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
कई कलाकारों और निर्देशकों को किया प्रेरित
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में आगे लिखा कि विजया मेहता के कार्यों ने अनेक कलाकारों, निर्देशकों और रंगमंच से जुड़े लोगों को नई सोच और प्रेरणा दी। उनकी कला केवल मंच तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने भारतीय थिएटर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके परिवार, प्रशंसकों तथा पूरे कला जगत के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
कौन थीं विजया मेहता?
विजया मेहता भारतीय रंगमंच, मराठी सिनेमा और समानांतर फिल्मों की एक जानी-मानी निर्देशक एवं अभिनेत्री थीं। उनका जन्म 4 नवंबर 1934 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था। रंगमंच की दुनिया में उन्हें सम्मानपूर्वक ‘बाई’ कहकर पुकारा जाता था।
उन्होंने थिएटर की दुनिया में कई प्रयोग किए और मराठी नाटकों को आधुनिक प्रस्तुति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पहचान केवल एक निर्देशक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कुशल अभिनेत्री और प्रशिक्षक के रूप में भी रही।
‘रंगायन’ थिएटर समूह की स्थापना
1960 के दशक में विजया मेहता ने प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर, डॉ. श्रीराम लागू और अरविंद देशपांडे जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर ‘रंगायन’ थिएटर समूह की स्थापना की। इस समूह ने भारतीय रंगमंच में कई नए प्रयोग किए और सामाजिक विषयों पर आधारित नाटकों को नई शैली में प्रस्तुत किया। विजया मेहता के निर्देशन में कई नाटक दर्शकों और समीक्षकों दोनों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।
रंगमंच और फिल्मों में छोड़ी अमिट छाप
विजया मेहता ने अपने करियर में अनेक चर्चित नाटकों का निर्देशन किया। इनमें ‘सखाराम बाइंडर’, ‘हमिदाबाईची कोठी’, ‘वाडा चिरेबंदी’ और ‘बैरियर’ जैसे महत्वपूर्ण नाटक शामिल हैं। फिल्म जगत में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने ‘राव साहेब’ (1986) और ‘पेस्टनजी’ (1988) जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया। इसके अलावा गोविंद निहलानी की फिल्म ‘पार्टी’ (1984) में उनके अभिनय को भी काफी सराहना मिली।
Aamir Khan Wedding: गौरी स्प्रैट संग आमिर खान की तीसरी शादी, सामने आई वेन्यू की डिटेल
भारतीय रंगमंच के लिए हमेशा रहेंगी प्रेरणा
विजया मेहता का पूरा जीवन कला, साहित्य और रंगमंच को समर्पित रहा। उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से भारतीय थिएटर को नई दिशा दी और कई युवा कलाकारों को मंच पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनका निधन भारतीय कला और संस्कृति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। हालांकि, उनके नाटक, फिल्में और रंगमंच के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।










