Jamuna Rani Death News: दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज गायिका जमुना रानी का 88 वर्ष की आयु में निधन

दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज और लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर जमुना रानी का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने तमिल, तेलुगु और मलयालम जैसी भाषाओं में 6,000 से अधिक सदाबहार गानों को अपनी आवाज दी थी। उनके इस अचानक निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है।

Jamuna Rani Death News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 31, 2026

Jamuna Rani Death News: भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी और दिग्गज प्लेबैक सिंगर जमुना रानी का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। ‘कुंगुमापूवे कोंजुम पुरावे’ जैसे अमर गीतों से अपनी अनूठी पहचान बनाने वाली जमुना रानी ने अपने शानदार और लंबे करियर में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम सहित विभिन्न भाषाओं में 6,000 से अधिक गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया। उनका यह महान संगीत योगदान हमेशा अमूल्य रहेगा।

‘त्यागय्या’ फिल्म से ऐतिहासिक डेब्यू

बताते चले कि, मूल रूप से आंध्र प्रदेश की रहने वाली जमुना रानी ने बहुत कम उम्र में ही गायन की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने मात्र 7 साल की उम्र से ही अपने पेशेवर करियर की शुरुआत कर दी थी। उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘त्यागय्या’ के जरिए एक प्लेबैक सिंगर के तौर पर सिनेमा जगत में अपना शानदार डेब्यू किया था। इसके बाद, साल 1952 में ‘कल्याणी’ फिल्म के माध्यम से उन्होंने तमिल सिनेमा में भी अपनी धमाकेदार एंट्री की। उन्होंने अपने जीवनकाल में ‘सेंथामिज तेन मोज़ियाल’, ‘यारादी नी मोहिनी’, ‘कुंगुमापूवे कोंजुम पुरावे’, ‘मामा मामा मामा’ और ‘कालाई वयसु कट्टाना साइज़’ जैसे कई सुपरहिट और सदाबहार गाने गाए, जिन्हें आज भी दर्शक बेहद पसंद करते हैं।

दक्षिण भारतीय संगीत का सुनहरा दौर

जमुना रानी ने अपने लंबे और सफल कला जीवन में अपार ख्याति अर्जित की। उन्होंने उस दौर के तमाम दिग्गज संगीतकारों और बड़े फिल्म निर्माताओं के साथ मिलकर काम किया। दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम काल में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी कला साधना और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। वर्ष 1998 में तमिलनाडु सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘कलईमामणि पुरस्कार’ से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें ‘अन्ना पुरस्कार’ जैसे अन्य कई महत्वपूर्ण सम्मानों से भी नवाजा गया, जो उनके बेजोड़ संगीत सफर की गवाही देते हैं।

सोशल मीडिया पर शोक की लहर

सुरों की मल्लिका जमुना रानी के निधन की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई है। सिनेमा जगत के दिग्गजों से लेकर आम संगीत प्रेमियों तक, हर कोई सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। भले ही आज जमुना रानी भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मधुर आवाज और उनके अमर गीत हमेशा हमारे दिलों में जीवंत रहेंगे। उनका प्रेरणादायक संगीत सफर और योगदान आने वाली हर नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक बड़ी मिसाल और मार्गदर्शन बनता रहेगा।