Uttarakhand News: उत्तराखंड में जाम से मिलेगी मुक्ति? कई फ्लाईओवर और अंडरपास को मंजूरी

उत्तराखंड में जाम और सड़क हादसों से परेशान लोगों के लिए बड़ी खबर है। गोरापड़ाव और तीनपानी में फ्लाईओवर-अंडरपास बनेंगे, जबकि लालकुआं और हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास को भी मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं से यातायात कितना आसान होगा? कहां बनेंगे नए पुल और किन मंजूरियों के कारण निर्माण में देरी हो सकती है?

उत्तराखंड में जाम से मिलेगी मुक्ति?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 25, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। गोरापड़ाव और तीनपानी में फ्लाईओवर व अंडरपास बनाए जाने की योजना है। इन निर्माण कार्यों पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से यातायात का दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी।

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गोरापड़ाव और तीनपानी में बनेंगे फ्लाईओवर

एनएच-109 पर गोरापड़ाव और तीनपानी लंबे समय से यातायात दबाव और दुर्घटनाओं की समस्या से जूझ रहे हैं। हाल ही में गोरापड़ाव ओवरब्रिज पर हुए हादसे में तीन छात्रों की मौत और एक छात्रा के घायल होने की घटना ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी। ऐसे में फ्लाईओवर और अंडरपास के निर्माण को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन सुविधाओं के तैयार होने के बाद वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

लालकुआं बाईपास को केंद्र की हरी झंडी

लालकुआं बाईपास को केंद्र की हरी झंडी
लालकुआं बाईपास को केंद्र की हरी झंडी

लालकुआं शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए बाईपास परियोजना को भी केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। प्रस्तावित मार्ग की कुल लंबाई 7.2 किलोमीटर होगी, जिसमें 5.277 किलोमीटर नया रास्ता बनाया जाएगा। चार लेन का यह बाईपास भारी और बाहरी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश किए बिना आगे निकलने का विकल्प देगा। इससे स्थानीय सड़कों पर वाहनों का दबाव घटने और लोगों के सफर में लगने वाला समय कम होने की संभावना है।

पुलों और अंडरपास से बेहतर होगी आवाजाही

लालकुआं बाईपास परियोजना में तीन छोटे पुल, दो चार लेन वाले रेलवे पुल और चार वाहन अंडरपास बनाने का प्रस्ताव शामिल है। नगला बाईपास के पास टांडा क्षेत्र में लगभग 600 मीटर सड़क का संरेखण बदलने की योजना है। यहां तीखे मोड़ को सीधा किया जाएगा, जिससे वाहन चालकों को सुरक्षित और सुगम रास्ता मिल सके। हालांकि, परियोजना के वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने और यातायात व्यवस्था के प्रभावी संचालन के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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वन भूमि और जरूरी अनुमतियां होंगी अहम

वन भूमि और जरूरी अनुमतियां होंगी अहम
वन भूमि और जरूरी अनुमतियां होंगी अहम

इस परियोजना के लिए लगभग 31.40 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। इसमें करीब 23.5 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है। इसलिए भूमि अधिग्रहण के साथ वन विभाग, रेलवे और वन्यजीव संबंधी आवश्यक अनुमतियां लेना भी जरूरी होगा। पंतनगर एयरपोर्ट के आसपास सड़क के संरेखण में संभावित बदलाव के विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने का परियोजना की समयसीमा पर असर पड़ सकता है।

हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास भी होगा विकसित

हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास को भी मंजूरी दी गई है। इसकी लंबाई करीब 8.4 किलोमीटर प्रस्तावित है। योजना के तहत मौजूदा सड़क को चार लेन में विकसित करने, गौला नदी पर नया दो लेन का पुल बनाने और लगभग 1.4 किलोमीटर हिस्से में मार्ग परिवर्तन का प्रस्ताव है। इसके अलावा हल्द्वानी स्टेडियम से काठगोदाम स्थित गौला पुल तक सड़क को चार लेन करने की योजना भी बताई गई है।

केंद्रीय मंत्री ने बताईं परियोजनाओं की खूबियां

केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा के अनुसार, लालकुआं बाईपास की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार हो चुकी है। इन योजनाओं से क्षेत्र में यातायात को सुगम बना

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