Uttarakhand News: रेखा आर्या प्रकरण में SIT की जांच तेज, गिरधारी पर चार कंपनियों से हटाने का आरोप

रेखा आर्या प्रकरण में एसआईटी की जांच के दौरान कंपनियों से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। आरोप है कि उन्हें चार कंपनियों के निदेशक पद से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल हुआ। हल्द्वानी और बरेली से जुटाए गए रिकॉर्ड क्या इस मामले की असली तस्वीर सामने लाएंगे? जांच जारी है।

रेखा आर्या प्रकरण में SIT की जांच तेज

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 25, 2026

Advertisements
728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

Uttarakhand News: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच आगे बढ़ रही है। कंपनियों के दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान जांच टीम को कुछ अहम जानकारियां मिलने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेखा आर्या ने आरोप लगाया है कि उनके पति गिरधारी लाल साहू ने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उन्हें चार कंपनियों के निदेशक पद से हटाया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और साक्ष्यों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।

Uttarakhand News: उत्तराखंड में जाम से मिलेगी मुक्ति? कई फ्लाईओवर और अंडरपास को मंजूरी

शिकायत के आधार पर दर्ज हुई प्राथमिकी

इस मामले में रेखा आर्या की शिकायत पर देहरादून के कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। टीम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित कंपनियों में निदेशक पद से हटाने की प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई और क्या इस दौरान कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों या हस्ताक्षरों का इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसी दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

फार्महाउस की जमीन से जुड़ी कंपनी भी जांच के दायरे में

फार्महाउस की जमीन से जुड़ी कंपनी भी जांच के दायरे में
फार्महाउस की जमीन से जुड़ी कंपनी भी जांच के दायरे में

रिपोर्ट के अनुसार, बरेली-सीतापुर राजमार्ग के पास लालपुल गांव में बन रहे एक फार्महाउस की जमीन से जुड़ी कंपनी के दस्तावेज भी जांच के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल हैं। बताया गया है कि इस जमीन की मालिकाना प्रविष्टि मेसर्स कृष्णा-वैष्णवी एंटरप्राइजेज के नाम पर थी। बरेली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, रेखा आर्या और सतेंद्र राठौर इस कंपनी में निदेशक थे। अब जांच में कंपनी के रिकॉर्ड और निदेशक पद से जुड़े बदलावों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

अन्य कंपनियों में हिस्सेदारी की जानकारी

मामले में बनखंडी रुद्राक्षधाम इन्फ्राडेवलपर प्राइवेट लिमिटेड और श्री अंबे ऑटो डीलर प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों में रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू की हिस्सेदारी बताई जा रही है। एसआईटी इन कंपनियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि निदेशक मंडल में कब और किस प्रक्रिया के तहत बदलाव किए गए। इन जानकारियों से मामले की जांच को दिशा मिलने की उम्मीद है।

हल्द्वानी और बरेली से जुटाए गए दस्तावेज

जांच के सिलसिले में एसआईटी की टीमें हल्द्वानी और बरेली भी पहुंची थीं। वहां से कंपनियों से जुड़े कई दस्तावेज कब्जे में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। इन रिकॉर्डों की पड़ताल के जरिए यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि संबंधित कंपनियों के आधिकारिक दस्तावेजों में क्या बदलाव दर्ज किए गए और उनकी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

हस्ताक्षरों की सत्यता जांचना अहम

इस प्रकरण में कथित हस्ताक्षरों की सत्यता जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू है। एसआईटी दस्तावेजों की जांच के साथ हस्ताक्षरों का मिलान कराने और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों की मदद लेने जैसी कार्रवाई कर सकती है। जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि निदेशक पद से हटाने के लिए संबंधित पक्षों की सहमति थी या नहीं और रिकॉर्ड में दर्ज प्रक्रिया वास्तविक तथ्यों से मेल खाती है या नहीं।

जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजरें

फिलहाल मामला जांच के अधीन है और सामने आए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। एसआईटी की दस्तावेजी पड़ताल, हस्ताक्षरों की जांच और कंपनियों के रिकॉर्ड से मिलने वाले तथ्य आगे की कार्रवाई के लिए अहम होंगे। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।