US Snowstorm Alert: अमेरिका में हिमयुग जैसी ठंड का अलर्ट, ट्रंप का ग्लोबल वार्मिंग पर तंज

अमेरिका में बर्फीले तूफान 'फर्न' ने मचाई तबाही, 2000 मील तक बिछी सफेद चादर, इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ग्लोबल वार्मिंग' पर तंज कसते हुए पूछा कि आखिर वह गर्मी कहां गई? क्या यह कुदरत का संकेत है या फिर दावों की पोल खुल गई है? जानें इस भीषण ठंड का पूरा सच।

US Snowstorm Alert

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 24, 2026

US Snowstorm Alert: अमेरिका इस समय कुदरत के भीषण प्रकोप का सामना कर रहा है। देश के 40 राज्यों में ‘हिमयुग’ जैसी जानलेवा ठंड की दस्तक ने पूरे राष्ट्र में दहशत फैला दी है। इस संकटपूर्ण स्थिति के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा की है, जिसने नई बहस छेड़ दी है। इस पोस्ट को बाद में व्हाइट हाउस द्वारा एक्स (X) पर भी साझा किया गया। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में ऐसी भयानक कोल्ड वेव आने वाली है, जैसी पहले कभी नहीं देखी गई। राष्ट्रपति ने इस पोस्ट के साथ अपनी एक तस्वीर भी साझा की है, जिसमें वह कड़ाके की ठंड से बचने के लिए एक लंबा काला गाउन पहने नजर आ रहे हैं।

ट्रंप का पर्यावरणविदों को जवाब: “ग्लोबल वार्मिंग कहां गई?”

हमेशा की तरह अपने बेबाक अंदाज में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस भीषण ठंड को जलवायु परिवर्तन के दावों के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “क्या पर्यावरणवादी विद्रोही कृपया समझा सकते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का क्या हुआ?” ट्रंप ने जलवायु कार्यकर्ताओं को ‘एनवायरनमेंटल इंसरेक्शनिस्ट्स’ (पर्यावरणवादी विद्रोही) कहकर संबोधित किया है। उनका यह पुराना रुख रहा है कि वे मौसमी अत्यधिक ठंड को ग्लोबल वार्मिंग के दावों को खारिज करने के सबूत के तौर पर पेश करते हैं। ट्रंप का यह तंज ऐसे समय आया है जब लाखों अमेरिकी बर्फबारी के बीच बिजली और सुरक्षा के लिए जूझ रहे हैं।

तापमान में ऐतिहासिक गिरावट: -40 डिग्री तक जम सकता है अमेरिका

मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार, अमेरिका के लगभग आधे हिस्से में तापमान माइनस 40 डिग्री फारेनहाइट तक गिर सकता है। यह आर्कटिक जैसी ठंड न केवल रिकॉर्ड तोड़ रही है, बल्कि जीवन के लिए भी घातक साबित हो रही है। दक्षिणी राज्यों जैसे टेक्सास और अर्कांसस से लेकर पूर्वी तट तक भारी बर्फबारी और बर्फीली बारिश का कहर जारी है। तेज हवाओं (विंड चिल) के साथ यह ठंड इतनी खतरनाक है कि कुछ ही मिनटों में फ्रॉस्टबाइट का खतरा पैदा हो रहा है। इसके कारण सड़कें बंद हो गई हैं और बिजली कटौती ने संकट को और गहरा कर दिया है।

230 मिलियन लोग प्रभावित: 12 राज्यों में इमरजेंसी घोषित

इस भयंकर विंटर स्टॉर्म का पैमाना इतना बड़ा है कि लगभग 170 से 230 मिलियन लोग इसकी सीधी चपेट में आ सकते हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए 12 से अधिक राज्यों में पहले ही आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों को घरों के भीतर रहने और सुरक्षित रहने की सलाह दी है। बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव और जानलेवा ठंड के कारण सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। टेक्सास जैसे राज्य, जो आमतौर पर इतनी भीषण ठंड के लिए तैयार नहीं होते, वहां स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।

वैज्ञानिकों का स्पष्टीकरण: ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) का खेल

राष्ट्रपति ट्रंप के व्यंग्य के विपरीत, जलवायु वैज्ञानिकों ने इस ठंड को जलवायु परिवर्तन का ही एक हिस्सा बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग का मतलब केवल गर्मी बढ़ना नहीं, बल्कि मौसम का अनियंत्रित और चरम (Extreme) होना भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘पोलर वोर्टेक्स’ (ध्रुवीय भंवर) में आने वाले विघटन के कारण उत्तर की ठंडी हवाएं दक्षिण की ओर धकेली जा रही हैं। यह अस्थिरता जलवायु संकट का ही परिणाम है, जिससे कभी अत्यधिक गर्मी, कभी विनाशकारी बाढ़ और कभी ऐसी असामान्य ठंड देखने को मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में व्यंग्य के बजाय ठोस बुनियादी ढांचे और नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है।

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