US Sacred Act: अमेरिका में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों पर बढ़ते हमलों और असुरक्षा के माहौल के बीच एक ऐतिहासिक पहल की गई है। अमेरिकी कांग्रेस में एक नया विधायी प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसे ‘US SACRED Act’ का नाम दिया गया है। इस बिल का प्राथमिक उद्देश्य हिंदू मंदिरों, यहूदी उपासना स्थलों और अन्य धार्मिक केंद्रों को नफरती हिंसा और व्यवधान से बचाना है। सांसद टॉम सुओजी और मैक्स मिलर द्वारा संयुक्त रूप से पेश किया गया यह प्रस्ताव अमेरिका की बहुसांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सांसदों का मानना है कि आस्था के केंद्रों पर बढ़ती असुरक्षा लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
क्या है SACRED Act? सुरक्षा के कड़े प्रावधान और सजा
इस कानून का पूरा नाम ‘सेफगार्डिंग एक्सेस टू कांग्रेगेशन्स एंड रिलीजियस एस्टैब्लिशमेंट्स फ्रॉम डिसरप्शन‘ (SACRED) है। इस बिल के तहत अब किसी भी पूजा स्थल के 100 फीट के दायरे में किसी भी व्यक्ति को डराना, धमकाना या धार्मिक गतिविधियों में बाधा डालना एक संघीय अपराध (Federal Offense) माना जाएगा। कानून के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पहली बार इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसे एक साल की जेल हो सकती है। वहीं, दूसरी बार या बार-बार अपराध करने पर सजा को बढ़ाकर तीन साल की जेल तक किया जा सकता है। इसके अलावा, यह बिल पीड़ितों को अपराधियों के खिलाफ दीवानी (Civil) मुकदमा दर्ज करने का अधिकार भी देता है ताकि वे अपने नुकसान की भरपाई कर सकें।
हिंदू मंदिरों और यहूदी संस्थानों पर मंडराता खतरा
हाल के वर्षों में अमेरिका में ‘हिंदूफोबिया’ और यहूदी विरोधी घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) के अनुसार, पूरे अमेरिका में मंदिरों को अपवित्र करने और वहां तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे हिंदू श्रद्धालुओं के मन में भय पैदा हुआ है। दूसरी ओर, एंटी-डेफेमेशन लीग के आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में यहूदियों के खिलाफ नफरत की रिकॉर्ड 9,354 घटनाएं दर्ज की गईं। ‘अमेरिकन ज्यूइश कमेटी’ की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 55 प्रतिशत यहूदियों ने हमलों के डर से अपनी दैनिक जीवनशैली में बदलाव किया है। SACRED Act इन सभी समुदायों को सुरक्षा की गारंटी देने का वादा करता है।
विरोध का अधिकार और सुरक्षा के बीच संतुलन
इस बिल को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण यह भी दिया गया है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला नहीं है। अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन (First Amendment) के तहत नागरिकों को मिलने वाला ‘शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार’ पूरी तरह बरकरार रहेगा। कानून निर्माताओं ने साफ किया है कि यह बिल केवल उन गतिविधियों को रोकेगा जो डराने-धमकाने या हिंसा फैलाने के उद्देश्य से की जाती हैं। किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन या संवैधानिक गतिविधि पर यह कानून लागू नहीं होगा। इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्थलों के आसपास एक सुरक्षित ‘बफर जोन’ तैयार करना है ताकि श्रद्धालु बिना किसी उत्पीड़न के अपनी पूजा-अर्चना कर सकें।
विविध समुदायों का समर्थन: एकजुट हुआ अमेरिका
इस नए सुरक्षा बिल को समाज के हर वर्ग से व्यापक समर्थन मिल रहा है। ‘एंटी-डेफेमेशन लीग’ से लेकर ‘इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका‘ जैसी प्रमुख संस्थाओं ने इस बिल की सराहना की है। पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम और सिख समुदायों ने भी गुरुद्वारों और मस्जिदों के बाहर बढ़ती कट्टरता पर चिंता जताई थी। टॉम सुओजी के अनुसार, किसी भी अमेरिकी को अपने उपासना स्थल पर जाते समय डराया जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह प्रस्ताव न केवल हिंदू मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि अमेरिका में रहने वाले हर धर्म के व्यक्ति के लिए विश्वास और शांति का माहौल सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।









