US Iran War: 28 अप्रैल को इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में भीषण हवाई हमला किया। इस हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई, जिनमें दो पुरुष और एक महिला शामिल थीं। बताया गया कि मीडिया वाहन को निशाना बनाया गया था। मृतकों में हिजबुल्लाह के अल-मनार टीवी के वरिष्ठ संवाददाता अली शोएब और अल-मयादीन चैनल की पत्रकार फातिमा फ्तौनी शामिल थीं। फातिमा के भाई मोहम्मद फ्तौनी, जो वीडियो पत्रकार थे, भी इस हमले में मारे गए।
अली शोएब की मौत और इजराइली सेना का दावा
अल-मनार टीवी ने पुष्टि की कि उसके लंबे समय से संवाददाता रहे अली शोएब की हत्या कर दी गई। शोएब लगभग तीन दशकों से दक्षिणी लेबनान को कवर कर रहे थे। इजराइली सेना ने दावा किया कि शोएब हिजबुल्लाह का खुफिया एजेंट था और पत्रकारिता का मुखौटा ओढ़कर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। सेना ने आरोप लगाया कि वह इजराइली सैनिकों के ठिकानों की जानकारी साझा करता था, हालांकि इसके सबूत पेश नहीं किए गए।
फातिमा और मोहम्मद की शहादत
अल-मयादीन चैनल ने बताया कि जेज़ीन जिले में हुए हमले में उसकी संवाददाता फातिमा फ्तौनी और उनके भाई मोहम्मद की मौत हो गई। हमले से ठीक पहले फातिमा लाइव रिपोर्टिंग कर रही थीं। चैनल ने उन्हें बहादुर और अपने पेशे के प्रति समर्पित पत्रकार बताया।
पत्रकारों को निशाना बनाने का आरोप
यह हमला सीधे तौर पर उन पत्रकारों को निशाना बनाकर किया गया था जो इजराइली आक्रामकता को कवर कर रहे थे। अल-मयादीन ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उसके संवाददाताओं को निशाना बनाया गया। इससे पहले भी नवंबर 2023 और अक्टूबर 2024 में उसके पत्रकार इजराइली हमलों में मारे गए थे। चैनल ने आरोप लगाया कि इजराइल सुनियोजित तरीके से पत्रकारों पर हमले कर रहा है ताकि उसके अपराधों की सच्चाई दुनिया तक न पहुंच सके।
लेबनान राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे जघन्य अपराध बताया और कहा कि यह पत्रकारों की सुरक्षा करने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समझौतों का उल्लंघन है। राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि इजराइली आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और युद्ध के नियमों का उल्लंघन करती है क्योंकि पत्रकार नागरिक होते हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय संरक्षण प्राप्त होता है।
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