US Iran War 2026 : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण युद्ध में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में 21 अप्रैल की समय सीमा समाप्त होने से कुछ ही घंटे पहले एकतरफा युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि एक महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब ट्रम्प ने ऐसी घोषणा की है। इससे पहले अप्रैल की शुरुआत में भी उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की समय सीमा से ठीक पहले 15 दिनों का युद्धविराम घोषित किया था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या अमेरिका को अब इस बात का एहसास हो गया है कि ईरान को सैन्य रूप से परास्त करना उसकी उम्मीद से कहीं अधिक कठिन है।
खाली होता शस्त्रागार: मिसाइलों और डिफेंस सिस्टम का आधा स्टॉक खत्म
अमेरिका की इस शांति पहल के पीछे सबसे बड़ा कारण उसके हथियारों के जखीरे में आ रही भारी कमी को माना जा रहा है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जारी जंग में अमेरिका ने अपनी प्रमुख मिसाइलों का लगभग 50% भंडार इस्तेमाल कर लिया है। विशेष रूप से प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलों का 45% और थाड (THAAD) इंटरसेप्टर का आधा हिस्सा खत्म हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन आधुनिक हथियारों के उत्पादन की गति बहुत धीमी है; यदि आज नए अनुबंध भी किए जाएं, तो भंडार को फिर से भरने में तीन से पांच साल का समय लग सकता है।
महंगी सुरक्षा: ईरानी मिसाइलों को रोकने में खर्च हो रहे अरबों डॉलर
युद्ध के मैदान में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों की रक्षा करना पेंटागन के लिए सिरदर्द बन गया है। ईरान अब हाइपरसोनिक और क्लस्टर बमों जैसी उन्नत तकनीक वाली मिसाइलों का उपयोग कर रहा है। इन मिसाइलों को रोकने के लिए अमेरिका को अपने ‘पैट्रियट’ एयर डिफेंस सिस्टम से एक साथ कई इंटरसेप्टर दागने पड़ रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अब इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी किल्लत हो गई है। यहाँ तक कि जापान और दक्षिण कोरिया से मिसाइलों को मंगवाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
नौसैनिक ताकत पर चोट: टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति में भारी गिरावट
जमीनी हमलों के लिए अमेरिका की सबसे भरोसेमंद ‘टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइल’ (TLM) का स्टॉक भी तेजी से गिर रहा है। अमेरिकी नौसेना अब तक 1,000 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दाग चुकी है। वर्ष 2026 के लिए इन मिसाइलों का निर्धारित उत्पादन वर्तमान युद्ध की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी है। स्थिति इतनी गंभीर है कि जापान को दी जाने वाली 400 मिसाइलों की डिलीवरी में भी देरी हो रही है। बिना पर्याप्त गोला-बारूद के एक लंबी जंग लड़ना अमेरिका के लिए सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर आत्मघाती साबित हो सकता है।
ईरान का पलटवार: डेटा केबल्स और समुद्री मार्गों पर बढ़ता खतरा
दूसरी ओर, ईरान अपनी स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसने न केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कड़ा कर लिया है, बल्कि उन समुद्री केबलों को काटने की धमकी भी दी है जो वैश्विक इंटरनेट और डेटा कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं। इसके अलावा, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण मार्ग ‘बाब-अल-मंडेब’ को बंद करने की चेतावनी दी है, जहाँ से दुनिया का 12% व्यापार होता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला हुआ, तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस नेटवर्क को तबाह कर देगा। इन्ही कारणों से अमेरिका अब सम्मानजनक तरीके से इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहा है।
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