US India Trade War: 500% अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत की दो टूक, ऊर्जा नीति दबाव में नहीं बदलेगी

ट्रंप की 500% टैरिफ की महा-धमकी: क्या भारत के खिलाफ शुरू हो गया है अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक युद्ध? डोनाल्ड ट्रंप ने उस विवादित बिल को 'ग्रीन सिग्नल' दे दिया है जो रूसी तेल खरीदने पर भारतीय उत्पादों पर 500% ड्यूटी लगाने की शक्ति देता है। जयशंकर ने दो टूक कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें बाजार के हिसाब से तय करेगा, न कि किसी देश के दबाव में। क्या यह व्यापारिक जंग भारत की अर्थव्यवस्था को हिला देगी या भारत देगा करारा जवाब?

US India Trade War

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 9, 2026

US India Trade War: अमेरिका में प्रस्तावित 500 फीसदी टैरिफ बिल को लेकर भारत सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस मसले पर आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा है कि उसे इस प्रस्तावित कानून की पूरी जानकारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि भारत इस तरह के किसी भी दबाव में अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव नहीं करेगा।

क्या है अमेरिका का प्रस्तावित 500% टैरिफ बिल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल, यूरेनियम या अन्य रणनीतिक संसाधनों का आयात करने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अगर यह बिल अमेरिकी संसद से पास हो जाता है, तो रूस के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों को भारी आर्थिक झटका लग सकता है।

भारत, चीन और ब्राजील पर पड़ सकता है असर

यह प्रस्तावित टैरिफ बिल भारत समेत कई बड़े देशों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। भारत, चीन और ब्राजील रूस से कच्चे तेल और यूरेनियम के प्रमुख आयातक हैं। ऐसे में यदि अमेरिका इस कानून को लागू करता है, तो इन देशों पर सीधे तौर पर 500 फीसदी टैरिफ लगाए जाने की आशंका है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापारिक संबंधों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

ऊर्जा सोर्सिंग पर भारत का स्पष्ट रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों को लेकर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और जगजाहिर है। उन्होंने बताया कि भारत वैश्विक बाजार में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपनी ऊर्जा रणनीति तय करता है। उनका कहना था कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए भारत को अलग-अलग स्रोतों से सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा हासिल करनी होगी।

सस्ती ऊर्जा भारत की प्राथमिकता

रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत का मुख्य फोकस अपने नागरिकों को किफायती दरों पर ऊर्जा उपलब्ध कराना है। चाहे वह कच्चा तेल हो, गैस हो या अन्य ऊर्जा संसाधन—भारत सभी विकल्पों पर विचार करता है। सरकार का मानना है कि ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं है।

दबाव में नहीं बदलेगी भारत की नीति

विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि भारत की ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव के तहत तय नहीं होती। भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है और आगे भी ऐसा करता रहेगा। मंत्रालय के अनुसार, भारत वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए सबसे बेहतर और किफायती विकल्प चुने जा सकें।

वैश्विक बाजारों पर भारत की नजर

MEA ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हो रहे उतार-चढ़ाव को बारीकी से देख रहा है। बदलते भू-राजनीतिक हालात और व्यापारिक समीकरणों के बीच भारत अपनी रणनीति में लचीलापन बनाए रखना चाहता है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय फैसले का सीधा बोझ आम भारतीय उपभोक्ता पर न पड़े।

आगे क्या हो सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी टैरिफ बिल लागू होता है, तो इसका असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने ऊर्जा हितों से कोई समझौता नहीं करेगी और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्ते तलाशती रहेगी।

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