US attack Iran: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सनसनीखेज घोषणा करते हुए बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, यह हमला “मध्य पूर्व के इतिहास में अब तक की सबसे शक्तिशाली बमबारी” में से एक था। फ़ारस की खाड़ी में स्थित यह छोटा सा द्वीप ईरान के लिए न केवल सैन्य दृष्टि से, बल्कि आर्थिक रूप से भी रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि ईरान का अधिकांश तेल निर्यात इसी मार्ग से होता है। दिलचस्प बात यह रही कि फ्लोरिडा रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने इस ऑपरेशन पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दुनिया को इस बड़े सैन्य एक्शन की जानकारी दी।
ईरानी तेल बुनियादी ढांचे पर मंडराता खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने केवल सैन्य ठिकानों तक ही रुकने का संकेत नहीं दिया है। उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न की, तो अगला निशाना वहां का तेल बुनियादी ढांचा होगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के पास ऐसे अत्याधुनिक और विनाशकारी हथियार हैं जो ईरान के तेल भंडारों को पल भर में राख कर सकते हैं। यह बयान वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा करने वाला है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का सबसे संवेदनशील मार्ग है।
क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य शक्ति का विस्तार
युद्ध की आहट के बीच, अमेरिका ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अपनी सैन्य मौजूदगी को तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया है। रक्षा सूत्रों और ‘एसोसिएटेड प्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 2,500 अमेरिकी मरीन सैनिक और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली (USS Tripoli) को तत्काल प्रभाव से क्षेत्र की ओर रवाना होने का आदेश दिया गया है। 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की यह तैनाती इस बात का संकेत है कि अमेरिका किसी भी लंबे संघर्ष के लिए खुद को तैयार कर रहा है। हालांकि, रणनीतिक तनाव के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि ईरान की स्थिति कमजोर हो रही है और वह जल्द ही ‘सरेंडर’ कर सकता है।
सऊदी अरब में अमेरिकी विमानों पर ईरानी पलटवार
इस संघर्ष की आग केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं है। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान हवाई अड्डे को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए हैं। इस हमले में अमेरिकी वायु सेना के पांच ईंधन भरने वाले विमान (Refueling Planes) क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई और विमान पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं; उनकी मरम्मत की जा रही है। यह हमला दर्शाता है कि ईरान भी अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने के लिए क्षेत्र में स्थित सहयोगियों के ठिकानों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हट रहा है।
क्या पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहा है मिडिल ईस्ट?
वर्तमान परिस्थितियां एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर इशारा कर रही हैं। एक तरफ अमेरिका ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उसके तेल निर्यात केंद्रों पर प्रहार कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अमेरिकी सैन्य संपत्तियों और उनके सहयोगियों के हवाई अड्डों पर मिसाइलें दाग रहा है। मरीन सैनिकों की भारी तैनाती और ट्रंप के कड़े तेवर यह साफ करते हैं कि आने वाले दिन वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हैं, जहाँ एक छोटी सी चूक भी विश्व अर्थव्यवस्था को संकट में डाल सकती है।










