UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के करोड़ों निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) ने पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया को समाप्त कर इसे बेहद सरल बना दिया है। अब प्रदेश के मजदूर केवल अपने आधार कार्ड और कार्य अनुभव के प्रमाण के आधार पर अपना पंजीकरण करा सकेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा श्रमिक भी सरकारी तंत्र और जनकल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) से सीधा जुड़ सके।
आधार कार्ड से पंजीकरण की सुगम प्रक्रिया
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण की राह में आने वाली बाधाओं को दूर कर दिया गया है। अब श्रमिक पंजीकरण प्रक्रिया (Labor Registration Process) को डिजिटल रूप से और अधिक सुलभ बनाया गया है। पात्रता के मानकों के अनुसार, 18 से 60 वर्ष की आयु के ऐसे सभी निर्माण श्रमिक, जिन्होंने पिछले एक वर्ष के दौरान कम से कम 90 दिनों तक मजदूरी या निर्माण कार्य किया है, वे अपना नामांकन करा सकते हैं। आधार कार्ड को प्राथमिक दस्तावेज मानकर पंजीकरण की अनिवार्यता को सुगम बनाया गया है ताकि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान त्वरित गति से हो सके।
लेबर मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम
अधिक से अधिक कामगारों को पोर्टल से जोड़ने के लिए विभाग ने लेबर मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम (LMIS) का प्रभावी उपयोग शुरू किया है। इसके अतिरिक्त, जो श्रमिक तकनीक से परिचित नहीं हैं, उनके लिए सीधे निर्माण स्थलों (Construction Sites) पर विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश में लगभग 1.71 करोड़ से अधिक श्रमिकों और 4.66 लाख निर्माण स्थलों का पंजीकरण संपन्न हो चुका है। विभाग का लक्ष्य उन श्रमिकों तक पहुंचना है जो जानकारी के अभाव में अब भी इन सरकारी लाभों (Government Benefits) के दायरे से बाहर हैं।
कल्याणकारी योजनाओं की झड़ी
पंजीकृत श्रमिकों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने योजनाओं का एक विस्तृत जाल बुना है। इसमें कन्या विवाह सहायता योजना, महात्मा गांधी पेंशन योजना और जन आरोग्य योजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल हैं। विशेष रूप से, श्रमिकों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रदेश के 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय (Atal Residential Schools) संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ वर्तमान में करीब 11 हजार बच्चे निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा, मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना और संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना के जरिए परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है।
भ्रष्टाचार पर लगाम
श्रम विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कोई भी बिचौलिया श्रमिकों का शोषण न कर सके। यदि कोई व्यक्ति पंजीकरण या लाभ दिलाने के बदले पैसों की मांग करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001805412 जारी किया गया है। विभाग का उद्देश्य प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता (Transparency) बनाए रखना है। कौशल विकास और तकनीकी उन्नयन योजना के माध्यम से श्रमिकों की दक्षता बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सकें।










