UP Politics: विधानसभा में सपा का ‘ब्रह्माण अस्त्र’, अखिलेश की एक मांग से फंसी BJP?

यूपी विधानसभा सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज को लेकर एक ऐसी मांग रख दी है, जिसने सत्ता पक्ष के माथे पर पसीना ला दिया है। क्या यह अखिलेश यादव का 2027 के लिए 'ब्रह्माण कार्ड' है? जानिए सदन के भीतर की वो पूरी कहानी जिसने बीजेपी को बचाव की मुद्रा में ला दिया।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 20, 2026

UP Politics:  उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की प्रमुख पार्टियां इस वर्ग को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रही हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समुदाय को लेकर नया राजनीतिक दांव चला है। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में ब्राह्मण वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए सियासी बयानबाजी और पहलें लगातार बढ़ रही हैं।

कमाल अख्तर ने परशुराम जयंती पर अवकाश की उठाई मांग

समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर ने विधानसभा में 19 अप्रैल को परशुराम जयंती पर राजकीय अवकाश घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने सदन में कहा कि भगवान परशुराम, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, न केवल ब्राह्मण समाज बल्कि सभी वर्गों में पूजनीय हैं। उनके जन्मोत्सव पर सरकारी छुट्टी घोषित की जानी चाहिए ताकि लोग श्रद्धा और सम्मान के साथ इस पर्व को मना सकें।

अखिलेश सरकार का हवाला देकर मौजूदा सरकार पर निशाना

विधायक ने अपने वक्तव्य में कहा कि जब प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब परशुराम जयंती पर राजकीय अवकाश घोषित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने उस अवकाश को समाप्त कर दिया, जिससे ब्राह्मण समाज समेत अन्य वर्गों में नाराजगी पैदा हुई है। उनका दावा था कि इस निर्णय से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सरकार को इसे पुनः बहाल करना चाहिए।

अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती पर छुट्टी की मांग

कमाल अख्तर ने यह भी कहा कि 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती का विशेष महत्व होता है। सरकारी अवकाश न होने के कारण कई लोग व्यक्तिगत छुट्टी लेते हैं और व्यापारी अपने प्रतिष्ठान बंद रखते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि राजकीय अवकाश घोषित किया जाता है तो आम लोगों को सुविधा होगी और वे पूरे उत्साह के साथ उत्सव मना सकेंगे। सपा ने इस मुद्दे को सामाजिक सम्मान से जोड़ते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है।

स्पीकर सतीश महाना की संतुलित प्रतिक्रिया

सपा विधायक की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मुद्दों पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। उन्होंने सभी देवी-देवताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक विषय है और अंतिम निर्णय सरकार को लेना है। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि इस मुद्दे पर सरकार विचार कर सकती है, लेकिन फिलहाल कोई त्वरित घोषणा संभव नहीं है।

ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर बढ़ी सियासी कवायद

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सामान्य तौर पर इस वर्ग को भारतीय जनता पार्टी का समर्थक माना जाता रहा है, लेकिन हाल के कुछ विवादों के बाद उनकी नाराजगी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खासतौर पर शंकराचार्य से जुड़े विवाद के बाद विभिन्न राजनीतिक दल इस समुदाय को साधने की कोशिश में जुट गए हैं।

डैमेज कंट्रोल की कोशिशें और बढ़ती बयानबाजी

जहां समाजवादी पार्टी खुलकर सरकार की आलोचना कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर संतुलन साधने की कोशिश की। उन्होंने बटुकों का सम्मान कर संदेश देने का प्रयास किया कि सरकार ब्राह्मण समाज के साथ है। साफ है कि 2027 के चुनाव से पहले ब्राह्मण वोट को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होती नजर आ रही है।