UP Panchayat Election: ओबीसी आरक्षण के चलते टले यूपी पंचायत चुनाव, सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ओबीसी आरक्षण, अधूरी मतदाता सूची और कानूनी अड़चनों के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने का रास्ता चुना है। आखिर चुनाव कब होंगे और इसका राजनीतिक असर कितना बड़ा होगा, जानिए पूरी खबर।

ओबीसी आरक्षण के चलते टले यूपी पंचायत चुनाव

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 24, 2026

UP Panchayat Election: यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 अब तय समय पर नहीं हो पाएंगे। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाएंगे। प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। इसके बाद पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। इस बार सरकार ने ग्राम प्रधानों की मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें ही प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। इससे पहले पंचायतों में एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन अब व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

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ओबीसी आरक्षण बना चुनाव टलने की बड़ी वजह

पंचायत चुनाव में देरी की सबसे बड़ी वजह पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण को माना जा रहा है। सरकार समय पर पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं कर पाई, जिसके कारण आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके अलावा मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य भी अधूरा बताया जा रहा है। कुछ मामलों को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं भी लंबित हैं। इन सभी कारणों से चुनाव आयोग और सरकार समय पर पंचायत चुनाव कराने की स्थिति में नहीं पहुंच सके। ऐसे में सरकार ने फिलहाल पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति का रास्ता चुना है।

ग्राम प्रधानों को मिला बड़ा राहतभरा फैसला

प्रदेश सरकार के इस फैसले से ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत मिली है। ग्राम प्रधान संघ लगातार मांग कर रहा था कि पंचायतों में बाहरी अधिकारियों की जगह मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाए। ग्राम प्रधानों का कहना था कि जब एडीओ पंचायत जैसे अधिकारी प्रशासक बनते हैं तो गांव के विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है और स्थानीय समस्याओं को समझने में दिक्कत होती है। अब ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने से पंचायत स्तर के काम सुचारू रूप से चलते रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव चुनाव

हालांकि सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है, लेकिन आयोग की रिपोर्ट आने में अभी समय लग सकता है। इसके अलावा नई मतदाता सूची तैयार करने और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने में भी काफी समय लगेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जाएंगे। इससे प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने के बाद एक लंबे समय तक प्रशासकों के जरिए पंचायतों का संचालन किया जाएगा।

विपक्ष ने सरकार पर उठाए सवाल

पंचायत चुनाव समय पर न होने को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार ने जानबूझकर पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी की, ताकि पंचायत चुनाव समय पर न हो सकें। विपक्ष का कहना है कि बीजेपी को पंचायत चुनाव में हार का डर था, इसलिए चुनाव प्रक्रिया को टालने की कोशिश की गई। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव में देरी पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी कारणों से हुई है।

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गांवों के विकास कार्यों पर रहेगी नजर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायतों में प्रशासक व्यवस्था लागू होने के बाद गांवों के विकास कार्य किस तरह आगे बढ़ेंगे। सरकार का दावा है कि प्रशासनिक व्यवस्था में कोई रुकावट नहीं आने दी जाएगी और सभी योजनाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लोग यह उम्मीद कर रहे हैं कि पंचायत स्तर पर विकास कार्य, सफाई, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं प्रभावित न हों। आने वाले समय में सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सभी की नजर बनी रहेगी।