UP Panchayat Election 2026 : यूपी पंचायत चुनाव की राह हुई आसान, योगी सरकार ने गठित किया समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग

UP Panchayat Election 2026  : उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर जारी असमंजस की स्थिति अब समाप्त होती दिखाई दे रही है। सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में बहुप्रतीक्षित ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ (Dedicated Backward Class Commission) का औपचारिक गठन कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को इस महत्वपूर्ण आयोग की कमान सौंपी गई है। शासन द्वारा उनकी यह नियुक्ति आगामी 6 महीने के कार्यकाल के लिए की गई है। गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इस विशेष आयोग की स्थापना

UP Panchayat Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 21, 2026

UP Panchayat Election 2026  : उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर जारी असमंजस की स्थिति अब समाप्त होती दिखाई दे रही है। सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में बहुप्रतीक्षित ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ (Dedicated Backward Class Commission) का औपचारिक गठन कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को इस महत्वपूर्ण आयोग की कमान सौंपी गई है। शासन द्वारा उनकी यह नियुक्ति आगामी 6 महीने के कार्यकाल के लिए की गई है। गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इस विशेष आयोग की स्थापना को हरी झंडी दी गई थी।

जानिए आयोग के अध्यक्ष और नवनियुक्त सदस्यों की पूरी सूची

योगी सरकार द्वारा गठित इस उच्चस्तरीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के सुचारू संचालन के लिए न्यायविदों और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है। जहां सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को इस पूरे आयोग की अध्यक्षता की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं इसके सदस्यों के रूप में चार अन्य दिग्गजों को नामित किया गया है। इनमें सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एसपी सिंह के नाम शामिल हैं, जो आयोग की कार्यवाही को आगे बढ़ाएंगे।

पंचायत स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी की जांच करेगा आयोग

यह नवगठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय निकायों के स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक पृष्ठभूमि का व्यापक अध्ययन करेगा। आयोग के पास यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी कि वह उत्तर प्रदेश के सभी जिलों का दौरा करे या वहां से आंकड़े जुटाकर ओबीसी आबादी की वर्तमान स्थिति का आकलन करे। इसके साथ ही, सरकारी व्यवस्था और नीति-निर्माण में उनके प्रतिनिधित्व तथा मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के जमीनी प्रभावों की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी आरक्षण की नई रूपरेखा

पूरे राज्य में व्यापक सर्वेक्षण और डेटा विश्लेषण का काम पूरा करने के बाद, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपेगा। इस अंतिम रिपोर्ट में दिए गए सुझावों और आंकड़ों के आधार पर ही आगामी पंचायत चुनावों के लिए पिछड़े वर्ग के आरक्षण की एक नई और पारदर्शी रूपरेखा तैयार की जाएगी। हालांकि, इस पूरी कवायद के बीच राज्य सरकार और कानून विशेषज्ञों ने यह साफ कर दिया है कि नया आरक्षण ढांचा लागू होने के बाद भी ओबीसी के लिए निर्धारित कुल कोटा 27 प्रतिशत की अधिकतम कानूनी सीमा से आगे नहीं बढ़ेगा।

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही शुरू होगी पंचायत चुनाव की वास्तविक प्रक्रिया

राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में योगी सरकार के इस कदम को एक बड़ा और मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए इस आयोग का गठन बेहद जरूरी था। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही आयोग अपनी तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंप देगा, वैसे ही पंचायती राज विभाग सीटों के आरक्षण की अधिसूचना जारी कर सकेगा। इसके तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग के समन्वय से उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने की वास्तविक और आधिकारिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकेगी।

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